Sunday, 9 August 2020

कोरोना काल में वोट मांगने आने वाले नेताओं के लिये सवालों का काढ़ा ! मध्यप्रदेश के साथियों ने उपचुनाव के पहले जारी किया पर्चा 

 

☆राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्र में फुटबॉल बना माझी जनजाति प्रकरण


राष्ट्र चंडिका अमर नोरिया. केंद्र और राज्य में अगर एक ही दल की सरकार बन जायेगी तो मध्यप्रदेश के माझियों को जनजाति की सुविधा का लाभ दिया जायेगा. यह वाक्य अक्सर माझी समाज के परिचय सम्मेलनों सहित अन्य माझी समाज के कार्यक्रमों में 2014 के पहले अक्सर मंचों पर सुनाई देता था, और समय का खेल देखिये जब 2014 में केंद्र की सत्ता में बीजेपी की सरकार बन गई तो यही बीजेपी जो मध्यप्रदेश के माझियों को जनजाति की सुविधाओं का लाभ दिए जाने की बातों को अपने विधानसभा चुनाव 2008 और 2013 के चुनावी घोषणा पत्र में जिसका जिक्र कर प्रदेश के माझी निषाद समाज के लोगों की वोट बटोरी और उनके हितेषी होने का भरोसा भी दिला चुकी थी वही बीजेपी 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान माझी की उपजातियों को जनजाति की सुविधाएं देने और आरक्षण का लाभ दिए जाने की जो बातें उसने पिछले 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में अंकित की जाती थी उसकी चर्चा वह 2014 में केंद्र की सत्ता में बीजेपी के सत्ताशीन होने के बाद मध्यप्रदेश में हुए 2018 के चुनाव के बाद करती ही नहीं है ।  ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आखिर बीजेपी ने माझियों के साथ इतना बड़ा धोखा क्यों किया ? साथियों आने वाले समय में मध्यप्रदेश में 27 जगह पर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं गिनी चुनी सीटों की बात अगर हम छोड़ दें तो मध्यप्रदेश में होने वाले उपचुनाव में अधिकांश सीटों पर माझी समाज की जनसंख्या हजारों की संख्या में है । ऐसे में हम आने वाले विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के नेताओं से पूछें कि आखिर चुनावी घोषणापत्र में जो आपने 2008 व 2013 में केंद्र और प्रदेश में हमारी सरकार बन जाएगी तो हम मध्य प्रदेश के माझी जनजाति के जो लोग हैं उन्हें जनजाति की सुविधाएं देंगे वादा किया था उस वादे का क्या हुआ ? महत्वपूर्ण बात यह भी है कि कांग्रेस ने भी हमें हाशिये पर रखा और उसने भी विधानसभा चुनाव 2018 के अपने वचनपत्र में माझी की उपजातियों को जनजाति की सुविधाएं देने के मामले में सहानुभूति पूर्वक विचार करने की बात कही पर 15 महीने के शासनकाल में माझी प्रकरण पर कांग्रेस द्वारा सहानुभूति दिखाने जैसा कुछ नहीं दिखाई दिया  ! अब हम पूरी राजनीतिक एकजुटता के साथ भाजपा व कांग्रेस से यह सवाल करने के लिये तैयार हो जायें माझी जनजाति के मामले में आपकी नीति क्या है ? जब पूरे देश को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी जा रही हो तो हम अपने सभी युवाओं से भी आग्रह करें की राजनीतिक वंशवाद भतीजावाद के इस दौर में अपने भविष्य के प्रति जागरूक होकर हमारे संवैधानिक हक और अधिकार से वंचित करने वालों के खिलाफ अपने अपने क्षेत्र के युवाओं सहित समग्र समाज को जागरूक करें तभी हम आर्थिक,सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त हो सकेंगे.

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