Saturday, 31 August 2019

करोड़ों के फर्जीवाड़े में आखिर पुलिस क्यों नहीं कर रही गिरफ्तारी की कार्यवाही ? 

गाडरवारा,तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर और गोटेगांव में समर्थन मूल्य पर खरीदी में हुआ था फर्जीवाड़ा
      नरसिंहपुर - जिले में 2015 - 16 में गाडरवारा,2017 में तेन्दूखेड़ा,2018 में नरसिंहपुर व 2019 में गोटेगांव में की गई अनाज की समर्थन मूल्य पर खरीदी में जो फर्जीवाड़ा किये गया था उस मामले में नरसिंहपुर और गोटेगांव के मामलों में त्वरित कार्यवाही करते हुए शासन प्रशासन ने कुछ दोषियों पर कार्यवाही कर जेल तक पहुंचा दिया किन्तु 2017 में हुए तेंदूखेड़ा व 2015 - 16 में गाडरवारा की अरहर खरीदी में पुलिस की कार्यवाही किये जाने का आज भी इंतजार किया जा रहा है ? गौरतलब है कि जिले की गाडरवारा कृषि उपज मंडी में वर्ष 2015-16 में की गई अरहर खरीदी को लेकर हुये भ्रष्टाचार के मामलेेे में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने 2 सदस्यीय  जांच समिति का गठन कर इस मामले इस मामले में  जांच के आदेश दिये थे तब की  इस जांच समिति में  मुकेश सिंघई,प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम,नरसिंहपुर व जे पी सैयाम अनुविभागीय दंडाधिकारी गाडरवारा को इस मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था जिनके द्वारा इस पूरी अरहर खरीदी घोटाले की जांच की गई थी ।  जिसमें पाया गया था कि जवाहर कृषि उपज मंडी गाडरवारा में 11 जनवरी 2016 से 26फरवरी 2016 तक कृषकों से अरहर खरीदी की गई थी  खरीदी को लेकर इसमें भ्रष्टाचार किये जाने की शिकायत कलेक्टर नरसिंहपुर को की गई थी जिसको लेकर  जांच अधिकारियों ने इस मामले में किसी व्यक्ति को इस संबंध में साक्ष्य,सूचना या अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी  कार्यालय अनुविभागीय दंडाधिकारी गाडरवारा के पास  दिनांक 4 अप्रैल 2016 तक प्रस्तुत किये जाने की बात कही गई थी ।  जांच अधिकारियों के माध्यम से जब जांच की गई तो उन्होनें अपने जांच प्रतिवेदन में कलेक्टर नरसिंहपुर को पत्र क्रं. 973/प्रवा-1/अ.वि.अ./2016 गाडरवारा दिनांक 14.7.2016 के माध्यय से बताया गया कि जवाहर कृषि उपज मंडी गाडरवारा में की गई अरहर खरीदी की जांच में पाया गया कि खरीदी करने वाली कंपनी द्वारा बाहर से क्रय किये गये दलहन की मंडी शुल्क का भुगतान किये जाने के दस्तावेज पेश नहीं किये गये थे व कृषकों के रकबे की जांच के दौरान रकबे से औसत से दो गुने से तीन गुने तक अरहर विक्रय दर्शित पाई गई थी ।  इस पूरे अरहर घोटाले को लेकर जो सबसे बड़ी गड़बड़ी पाई गई थी वह यह थी कि जांच के दौरान एजेंट सहकारी समितियों के रिकार्ड में संधारित कृषक का नाम कृषक के पिता का नाम एवं निवास ग्राम का नाम मिलान करने पर जांच में कृषकों का नाम व निवास स्थान की पुष्टि नहीं हो सकी थी वहीं अरहर खरीदी के अंतगर्त एजेंसी का नियंत्रण एजेंट सहकारी संस्थाओं पर होना नहीं पाया गया तथा किसान से कम दर पर अरहर लेकर दलालों के माध्यम से कृषकों को फर्जी नाम पर क्रय करने में एजेंट सहकारी समिति की भूमिका संदेहास्पद पाई गई और जिस आधार पर इस पूरे प्रकरण की जांच करने वाले अधिकारियों ने अपने जांच प्रतिवेदन मे स्पष्ट दर्शाया कि इसमें गंभीर अनियिमिततायें की जाना जांच के दौरान परिलक्षित हुआ है अत: विस्तृत जांच की जाना उचित प्रतीत होता है । करोड़ों रुपये के इस फर्जीवाड़े के मामले में जांच और शिकायतों के बाद थाना गाडरवारा में एफआईआर दर्ज हुई थी और इसके बाद क्या कार्यवाही पुलिस द्वारा की गई किसकी गिरफ्तारी की गई यह आज तक पता नहीं चल पा रहा है । अरहर खरीदी घोटाले की जांच को लेकर इस पूरे मामले में जो कार्यवाही की जाना थी वह अभी तक नहीं हो पायी इससे सवाल तो तमाम उठते हैं किंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि सहकारी समितियों की जो भूमिका इस पूरे प्रकरण में जांच अधिकारियों के संदेह के घेरे में आई है और इस पर सहकारिता से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों का इस पूरे मामले में चुप रहना और सहकारी समितियों की मिलीभगत से इस पूरे घोटाले को जिस तरह से अंजाम दिया गया है इस पर विस्तृत जांच की जाने की आवश्यकता थी वह नहीं की गई जिसका नतीजा नरसिंहपुर जिले लगातार समर्थन मूल्य पर हुई खरीदी के फर्जीवाड़े के रूप में सामने आये । अब देखना यह है कि नरसिंहपुर और गोटेगांव में जिस त्वरित गति से जांच कर कार्यवाही हुई उसी तरह इस मामले के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्यवाही पुलिस कब तक कर पायेगी ? गौरतलब है कि 420 के अन्य मामलों में तेजी से धरपकड़ करने वाली पुलिस से बचते हुए कुछ आरोपी न्यायालय के चक्कर काट कर अपनी जमानत के जुगाड़ में लगे हैं फिर भी पुलिस उन् पर पुलिस का शिकंजा नहीं कस पा रहा है ।
कुमरोड़ा एनकाउंटर में निर्धारित तिथि तक मजिस्ट्रेट जांच में किसी ने नहीं दिये साक्ष्य व बयान और न ही मिली काली कार 

राष्ट्र चंडिका (अमर नोरिया) नरसिंहपुर - थाना सुआतला के अंतर्गत NH12 पर स्थित कुमरोड़ा गांव के नजदीक 18 - 19 अगस्त की दरमियानी रात हुए एनकाउंटर में मारे गए जबलपुर के इनामी आरोपियों की मौत के मामले में शासन द्वारा मजिस्ट्रियल जांच के आदेश के बाद 30 अगस्त तक इस संबंध में एसडीएम कार्यालय नरसिंहपुर में जनसामान्य सहित अन्य के द्वारा इस एनकाउंटर से संबंधित साक्ष्य एवं बयान दर्ज करने की तिथि निर्धारित की गई थी मिली जानकारी के अनुसार 30 अगस्त की समय सीमा के दौरान अनुविभागीय अधिकारी नरसिंहपुर के समक्ष कुमरोड़ा एनकाउंटर के मामले में किसी भी व्यक्ति या पक्ष द्वारा साक्ष्य या बयान नहीं दिए गए थे । इसी मामले एनकाउंटर के दौरान मौके से भागी काली स्विफ्ट डिजायर कार भी घटना के 13 दिन बीत जाने के पश्चात अभी तक नरसिंहपुर जिले सहित जबलपुर संभाग की किसी भी पुलिस के हाथ नहीं लगी है । एनकाउंटर के दौरान मौके से भागी काली स्विफ्ट डिजायर कार के पकड़े जाने के मामले में नरसिंहपुर पुलिस सहित अन्य जिलों की पुलिस द्वारा किसी भी तरह की सूचना अभी तक नहीं मिल पाई है । वहीं इस मामले को लेकर एनकाउंटर में मारे गये आरोपियों के परिजनों द्वारा पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर को एक ज्ञापन सौंपकर एनकाउंटर में शामिल अधिकारियों के कॉल डिटेल्स एवं उनकी कार्यप्रणाली की जांच को लेकर सीबीआई जांच की मांग की गई है ।