Friday, 26 July 2019

एटीएम की सुरक्षा भगवान भरोसे 



 राष्ट्र चंडिका सिवनी। जिला मुख्यालय सहित अन्य आसपास क्षेत्र में लगे एटीएम की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। जिला मुख्यालय में युनियन बैंक, सेन्ट्रल बैंक, एसबीआई, पीएनबी सहित अन्य बैंको  के एटीएम काउंटर संचालित हो रहे हैं। जिसमें शहरी क्षेत्र के कुछ एटीएम बुथ छोड़कर शेष एटीएम में सुरक्षा अनेदखी की जा रही है। कहीं सीसीटीवी कैमरा बंद है तो कहीं सुरक्षा गार्ड ही नजर नहीं आ रहे हैं। कई एटीएम ऐसे है जहां सफाई तक नहीं होती। वहीं जहां सुरक्षा गार्ड लगे हुए भी हैं तो वे एटीएम छोड़कर आसपास घुमते नजर आते हैं। रात के वक्त अधिकतर एटीएम बुथ में सुरक्षा नदारद रहते हैं। जिनकी परवाह किसी को नहीं है। इसके चलते अप्रिय घटनाओं की आशंका है। कुछ समय पूर्व बारापत्थर स्थिति एटीएम के गेट का कांच असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया था।  निजी बैंकों एटीएम में सुरक्षाकर्मी नजर आ ही जाते हैं। लेकिन शासकीय बैंकों के एटीएम में सुरक्षा के मापदंडो को पूरी तरह अनदेखा किया जा रहा है।  एटीएम बुथ में उपभोक्ता एक साथ अंदर चले जाते हैं। जिन्हें रोकने के लिए वहां कोई भी सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं रहता। कुछ लोग चेहरे पर नाकाब बांध कर एटीएम से निकासी कर रहे हैं। हलांकि कुछ एटीएम काउंटर में हेलमेट व नाकाब लगाकर प्रवेश करना वर्जित लिखा हुआ है। लेकिन इसका पालन कराने के लिए वहां कोई भी मौजूद नहीं रहता। केंद्र सरकार ने सभी एटीएम काउंटरों पर ग्राहकों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने गार्ड तैनात करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन जिले में इसका असर होता नजर नहीं आ रहा है। 


आवारा कुत्तों के आतंक से शहर त्रस्त


 राष्ट्र चंडिका सिवनी। यूं तो कुत्ते को सबसे वफादार जानवर माना जाता है, लेकिन अगर यह वफादारी भूल जाए तो जानलेवा हो सकता है। हम बात कर रहे हैं कुत्ते के काटने से होने वाली बीमारी रेबीज की। सबसे ज्यादा मुसीबत का सबब बने हुए हैं स्ट्रीट-डॉग यानी आवारा कुत्ते। बात सिवनी की करें तो यहां ऐसी कोई गली और मोहल्ला नहीं, जहां आवारा कुत्तों का आतंक न हो। शाम ढलने के बाद शहर के गली-मोहल्लों में पैदल या दुपहिया पर निकलना खतरे से खाली नहीं। दोपहर में भी ये कुत्ते बच्चों को निशाना बनाने से नहीं चूकते। शिकायतों के बावजूद नगर पालिका  इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा। न तो कुत्तों की नसबंदी हो रही है, न ही इन्हें कहीं छोड़ा जा रहा। शहर के विभिन्न सड़कों और मोहल्लों में इन कुत्तों का खौफ इस कदर छाया हुआ है कि लोग रात तो रात दिन में भी इनके झुंड को देखकर रास्ता बदल लेने में ही गनीमत समझते हैं।  कुत्तो के आतंक से स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को सबसे अधिक खतरा है। बच्चों को देखकर ये कुत्ते दौड़ा लेते हैं। जबकि बुधवारी  बाजार, बस स्टेड, मठ मंदिर मैदान में   ये कुत्तो  कब्जा किए रहते हैं और देर रात लोगों को देखते ही गुर्राने लगते हैं इस दौरान अगर आपने भागने की कोशिश की तो वह काट भी लेंगे।

Friday, 12 July 2019



जालसाज और खाली कर देते हैं बैंक अकाउंट 9 अंक का कोड मांगते हैं 


नई दिल्ली.प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंक HDFC Bank ने हाल में अपने सभी ऑनलाइन बैंकिंग यूजर्स को एक खास ऐप को लेकर आगाह किया है। जालसालों ने इस ऐप का इस्तेमाल लोगों के बैंक अकाउंट में सेंधमारी के लिए किया है। HDFC बैंक ने चेताया है, 'जालसाज आपसे AnyDesk Appडाउनलोड करने और 9 अंक का कोड शेयर करने के लिए कह सकते हैं। इस कोड को शेयर करते ही जालसाजों की पहुंच आपके फोन तक हो जाएगी और वह इससे आपके बैंक खाते में सेंधमारी करके बड़ी चपत लगा देंगे।'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी इस साल मार्च में ऐसी एडवायजरी जारी की थी। RBI ने इस बात का जिक्र किया था कि AnyDesk ऐप रेग्युलर प्रिवेसी परमिशंस मांगता है, यह कहीं दूर से भी आपके स्मार्टफोन तक पहुंच बनाने में सक्षम है। इससे जालसाज कहीं से भी बैंकिंग ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।


दूर से डिवाइस कंट्रोल करने वाले ऐप्स की भरमार
रोचक बात यह है कि AnyDesk एक वैध ऐप है। इस बात को लेकर भी संशय करने की जरूरत नहीं है कि इसमें मैलवेयर है। असल बात यह है कि AnyDesk इकलौता ऐप नहीं है, जिसे लेकर चिंतित होने की जरूरत है। ऐसे रिमोट डिवाइस कंट्रोल ऐप्स की भरमार है, जो कि दूर-दराज कहीं से भी आपके फोन के जरिए बैंक अकाउंट तक पहुंच सकते हैं। किसी दूसरे रिमोट डिवाइस कंट्रोल ऐप की तरह AnyDesk आईटी प्रोफेशनल्स के लिए एक टूल है, जिसकी मदद से वह ऑन-साइट न होते हुए भी दूर से रिमोट डिवाइस पर काम कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि इस टूल या किसी रिमोट डिवाइस कंट्रोल ऐप का इस्तेमाल करते हुए आप अपने घर से ही सिक्योर्ड ऑफिस कंप्यूटर पर काम कर सकते हैं।AnyDesk के सीओओ ओल्डरिच मुलर का कहना है, 'लाखों इंडीविजुअल्स इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, 165 देशों में 17,000 कंपनियां इसका यूज करती हैं। AnyDesk यूजर्स के कंप्यूटर्स को सुरक्षित रखने के लिए बैंकिंग स्टैंडर्ड TLS 1.2 टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करता है। साथ ही, हर कनेक्शन को वैरिफाई करने के लिए यह RSA 2048 एसमेट्रिक की एक्सचेंज एनक्रिप्शन यूज करता है।' इस मामले में बहुत हद तक स्थिति बिल्कुल वैसी ही है, जिसमें वॉट्सऐप जैसे पॉप्युलर और उपयोगी टूल्स का इस्तेमाल फेक न्यूज फैलाने के लिए किया गया। AnyDesk के मामले में बहुत कम नॉन-आईटी प्रोफेशनल्स इस ऐप के बारे में जानते होंगे।


AnyDesk के सीओओ ने बताया, कैसे ऐसे फ्रॉड से बचें
ऐसे फ्रॉड तभी हो सकते हैं, अगर यूजर अपने डिवाइस का एक्सेस किसी को दें। हम अपने यूजर्स को लगातार याद दिलाते रहते हैं कि उन्हें एक्सेस कोड केवल उन्हीं लोगों के साथ साझा करना चाहिए, जिन्हें वह जानते हैं। अगर कोई व्यक्ति यह दावा करे कि वह किसी इंस्टिट्यूशन (बैंक और दूसरी संस्थाएं) से बोल रहा है तो आपको उसके झांसे में नहीं आना चाहिए और सीधे इंस्टिट्यूशन से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, AnyDesk यूजर ऐसे किसी फ्रॉड की घटना को सीधे रिपोर्ट कर सकते हैं ताकि हम जालसाजों की सॉफ्टवेयर तक पहुंच हमेशा के लिए ब्लॉक कर सकें।

Sunday, 7 July 2019

*ऋतिक रोशन द्वारा 'नेशन-बिल्डर' कहे जाने पर, शिक्षक और विश्वविद्यालय ने अभिनेता के प्रति आभार किया व्यक्त!* 
 बीते दिन अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया था जिसमें शिक्षकों के प्रयास और महत्व पर रोशनी डाली गई थी जो न केवल हर व्यक्ति के भविष्य की नींव है, बल्कि सही मायनों में हमारे समाज और देश के भविष्य के राष्ट्र निर्माता हैं। स्वयं सुपरस्टार से मान्यता के लिए आभारी, शिक्षकों ने अभिनेता के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है और अपने प्यार का इजहार किया है। अभिनेता के ट्वीट के ठीक बाद, पोस्ट में जनता द्वारा किये गए कई ट्वीट्स देखने मिल रहे है, जो अभिनेता को उनके विचारों के लिए सराहते हुए नज़र आये और उन शिक्षकों को सम्मान देने की पहल की है, जिनके बारे में उनका मानना है कि, "विचारों को आगे पास किया जाता है, बीज बोया जाता है, दूसरों को सिखाया जाता है। ऐसे ही लोग सीखते हैं, ऐसे ही देश का विकास होता हैं। यदि आप एक राष्ट्र निर्माता बनना चाहते हैं, तो शिक्षक बनें। इतना ही नहीं, अभिनेता ने सभी से आग्रह किया कि वे एक प्रोफ़ेशन के रूप में शिक्षण को भी अपनाएं। जबकि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने अपने आधिकारिक हैंडल पर ऋतिक के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए, मुंबई के डॉ अवनीश कुमार ने साझा किया,"Thrilled to receive a tweet mention from Hrithik Roshan himself. Being a great fan of Anand Kumar, I await the release of Super 30”. एक अन्य प्रोफेसर, जेएनयू के हैपिमोन जैकब ने ट्वीट करते हुए लिखा, “This is very thoughtful and so heart-warming! :) @iHrithik”. दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कौशिक बसु, जो अब कॉर्नेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी हैं, उन्होंने अपने एक प्ले को याद करते हुए, साझा किया,"From my play, Crossings at Banaras Junction. Siddharth: Today is de Beauvoir’s birthday. This is an auspicious day for Kavita to reclaim her life. Gupta: Professor, I recommend she wait one more day since tomorrow’s even more auspicious. It’s Hrithik Roshan’s birthday! @iHrithik” ऋतिक के इस पोस्ट को देश भर के शिक्षकों और प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ-साथ उनके प्रशंसकों से भी दिल छू लेने वाली प्रतिक्रिया मिल रही है, जो ऋतिक द्वारा देश के राष्ट्र-निर्माताओं के प्रति दिखाये गए उनके सम्मान और प्रेम के लिए प्रशंसा कर रहे है। अभिनेता स्वयं अपनी आगामी फिल्म में एक शिक्षक की भूमिका में नज़र आएंगे। ऋतिक रोशन अपनी आगामी फिल्म सुपर 30 में एक गणितज्ञ के किरदार में नज़र आएंगे, जो 30 छात्रों को आईआईटी-जेईई की प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार करते है। फिल्म के ट्रेलर में ऋतिक के साथ मृणाल ठाकुर भी नज़र आ रही हैं, जिसे "वर्ष का सर्वश्रेष्ठ ट्रेलर" कहा जा रहा है। फिल्म 'सुपर 30' 12 जुलाई, 2018 को रिलीज होने वाली है और यह साल की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक है। ऋतिक न केवल ऑन स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन सुपर 30 छात्रों से लेकर आनंद कुमार के रियल छात्रों के साथ एक बॉन्ड साझा करते है, बल्कि अभिनेता ने समाज के बच्चों के भविष्य को आकार देने वाले शिक्षकों को भी उचित सम्मान दिया है।

Saturday, 6 July 2019

सिवनी बना सट्टे मटके के मामले में मिनी महाराष्ट्र

*सीसीटीवी कैमरे से रख रहे हैं अपने अवैध धंधों पर नजर*
*खुलेआम खेला जाता है सट्टा प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम चल रहा है नम्बरों का काला खेल*

 राष्ट्र चंडिका सिवनी ।  सिवनी बना मिनी महाराष्ट्र महाराष्ट्र की तर्ज पर सिवनी में जगह-जगह सट्टा मटका के नंबर खोले जा रहे है इतना ही नहीं इंटरनेट पर चल रहे सट्टा मटका डॉट कॉम में (कुछ शुल्क देकर)अपने खेल का रिजल्ट देकर यह यह अवैध सट्टे के गेम को बाहर का खेल बता कर सिवनी से ही सट्टा मटके का नंबर खोल रहे हैं बताया जाता है कि सिवनी में चार नामों से सट्टे का मटका चलाया जा रहा है जिसमें  डे और नागपुर दिन और रात के नाम से सिवनी से ही सट्टे का नंबर खोला जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि कई ऐसे सफेदपोश लोग भी इनके काले कारनामों में इन सट्टेबाजों का साथ देते हैं। और तो और कुछ सट्टेबाज राजनीतिक दलों से भी जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि अभी तो एक दो ही सट्टेबाज सिवनी  से ही सुबह शाम सट्टा मटका का नंबर खोल रहे हैं और बकायदा इंटरनेट पर चल रहे सट्टा मटका डॉट कॉम( कुछ शुल्क देकर) में इसका रिजल्ट समय पर दे रहे हैं ।जिन्हें पुलिस प्रशासन का कोई डर नहीं है इसी के चलते वह अपने इस खेल को खुलेआम चला रहे हैं।

            शहर में इन दिनों खुलेआम चल रहे सट्टा कारोबार पर अंकुश न लगने से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। समाज में जुआ सट्टा कोई नई बात नहीं है। पहले चंद लोग इसमें लिप्त हुआ करते थे, जल्द धनवान बनने की चाहत में इसका प्रचलन बढ़ता चला गया। नगर में बीते कुछ महीनों से तेज़ी से अवैध रूप से सट्टे का कारोबार तेज़ी से पांव पसार रहा है और सट्टा व्यापारी तेज़ी से फल फूल रहें हैं। सट्टे के बढ़ते क्रेज़ को देखते हुए कुछ लोगों ने इसे व्यवसाय बना लिया है। यह व्यापार इस कदर बढ़ा है कि शहर में रोज़ाना लाखों का सट्टा लग रहा है। पैसा कमाने की तीव्र चाहत और भाग्यवादी सोच के लोग तेज़ी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सट्टे में अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं। इस खेल में पड़कर युवा पीढ़ी बर्बादी की कगार पर जा रही है क्योंकि बिना मेहनत के अमीर बनने की चाहत रखे युवा पीढ़ी इसकी गिरफत में तेज़ी से आती जा रही है। एक का सौ बनाने की चाहत सट्टे के शौकीन लोगों को विनाश की ओर ले जा रही है। इस पर दांव लगाने वाले लोग यह नहीं जानते कि हार जीत का यह अंधा खेल अन्तहीन है। चोरी छिपे किये जाने वाले इस गैरकानूनी धंधे को बाकायदा एक खेल का रूप देकर इसे शहर में ही कई स्थानो पर खेला जा रहा है। शहर की तंग गलियों तक में सट्टा खेला जा रहा है। सट्टा कारोबार पुलिस की नाक के नीचे धड़ल्ले से फल फूल रहा है। इसके बावजूद पुलिस मामले में कोई ठोस कार्यावाही नहीं कर रही है। ऐसे में पुलिस की भूमिका भी संदेहास्पद है। सटटे के अधिकांश अडडे पुलिस के संज्ञान में है लेकिन उन पर कार्यावाही नहीं की जा रही है। 

सट्टेबाज दे रहे पुलिस को चुनौती

 जी हां सिवनी जिले में सट्टेबाज पुलिस वालों को खुलेआम चुनौती देते नजर आ रहे हैं सट्टेबाज बकायदा अपने आसपास सीसीटीवी कैमरे का उपयोग कर अपने यहां आने वाले हर एक व्यक्ति पर नजर बनाए है बकायदा चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे पर यह निगरानी करते हैं और खुलेआम अपना सट्टा मटका का खेल खिलाते हैं

यह है खेलने का तरीका
इस खेल में शून्य से नौ तक ईकाई, दहाई का अंक लगाने पर एक रूपये के दस रूपये मिलते हैं। इसके अलावा एक से सौ तक का कोई नंबर लगाने पर अगर फंस गया तो 12 रूपये के 100 रूपये मिलते हैं। हर जीत पर रकम का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा ऐजेन्ट का है। इसके अलावा हार पर भी कुछ इतना ही मिलना तय है। सट्टे के कारोबार में केवल खाइवाल अपना घर भरता है। ओपन और क्लोज़ के इस खेल में 9 घर खाइवाल के पास होते हैं जबकि एक घर खेलने वाले के पास। विनाश के इस खेल में रूपये का लेनदेन ईमानदारी से किया जाता है। सूत्रों की माने तो नगर में रोज़ाना लाखों रूपये का सट्टा खेला जा रहा है।
लोगों को होना पडे़गा जागरूक
सामाजिक कोढ़ बन चुके इस इस अवैध काम से बचने के लिये लोगों को खुद जागरूक होना पडे़गा। कम समय और बिना मेहनत के सट्टे और मटके के इस खेल में नौजवान गलत रास्ते पर चल पढे़ हैं और युवा पीढ़ी इसमें फंसती जा रही हैं। अंको के इस जाल में छात्र, नवयुवक, बेरोज़गार, मज़दूर वर्ग अधिक प्रभावित हो रहे हैं और किस्मत के भरोसे अपना सबकुछ गंवा रहे हैं। सट्टे के इस कारोबार को रोकने के लिये पुलिस प्रशासन के साथ साथ आम नागरिक और जनप्रतिनिधियों को भी आगे आना पडे़गा।
ज़रूरत है बड़ी कार्यावाही की
सटोरियों  पर की जाने वाली कार्यावाही में अधिकांश प्रकरणों में सज़ा जुर्माना के तौर पर होती है जिसका फायदा क्षेत्र के खाइवाल उठा रहे हैं। पहले तो धरपकड़ नहीं की जाती, और अगर उच्चाधिकारियों के अभियान में किसी को पकड़ भी लिया जाये तो अधिकांश जुए की धारा में जेल भेजे जाते हैं। शायद यही कारण है सटोरियों में कानून का कोई भय नहीं होता। खाकी की ओर से अनदेखी जारी है जिससे सट्टा कारोबारियों के हौंसले बुलन्द हैं। अधिकांश अडडे पुलिस के संज्ञान में है पर कार्यावाही शून्य जिससे संरक्षण की बात सामने आती हैं। पुलिस की कार्यावाही सट्टे के धंधे पर अंकुश लगाने में नाकाफी साबित हो रही है। क्षेत्र के सटोरियों पर कड़ी कार्यावाही की ज़रूरत है।

कोचिंग संस्थान में टूट रहे सुरक्षा मानक

 राष्ट्र चंडिका सिवनी । सूरत में आग लगने से मारे गए कोचिंग के 22 छात्र-छात्राओं की मौत के बाद शहर के कोचिंग संस्थानों को अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन एक माह का समय बीत जाने के बाद भी कोचिंग संस्थाओं के हालात नहीं बदले हैं। कि जिले में कोचिंग संस्थान अवैध रूप से चल रही है और सूरत की घटना से भी जिला प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। जिम्मेदार अधिकारियों ने खाना पूर्ति की तरह जांच कर अपने कर्तव्य की पूर्ति कर ली है। जिले में लगभग डेढ़ दर्जन कोचिंग संस्थाएं संचालित है। कई संस्थानों ने अपने कोचिंग संस्थानों के वीआईपी और बड़े नाम रखे हैं, लेकिन उनके पास सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। बच्चों की सुरक्षा ताक पर रखी जा रही है। 

शहर में कोचिंग संस्थान बिना पंजीयन के ही चल रहे हैं। किसी भी विभाग द्वारा कोई रिकार्ड नहीं रखा जा रहा था। सूरत की घटना के बाद जब प्रशासन सक्रिय हुआ तो ये मामले भी सामने आए थे। वाणिज्यिक कर विभाग ने बीते साल कुछ स्थानों से प्रोफेशनल टेक्स जमा कराया था। एक भी संस्थान का जीएसटी नंबर नहीं है। कोचिंग संस्थान बच्चों से लाखों रुपए की फीस जुटा रहे हैं, लेकिन उनकी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है। हालांकि इस साल प्रशासन ने कोचिंग सेंटर के बारे में जानकारी जुटाई है। 
  नहीं है पार्किंग 
इन कोचिंग संस्थानों के पास पार्किंग नहीं है। वाहन सडक़ पर खड़े किए जा रहे हैं। इससे आसपास के लोगों को भी दिक्कत है। स्थिति यह निर्मित होती है कि बच्चे दूसरों के मकानों के आगे अपने वाहन खड़े करते हैं। अगर किसी को आपात स्थिति में घर से बाहर या अस्पताल तक जाना हो तो जा नहीं सकते। इससे आसपास के लोगों से विवाद हो रहे हैं।
होने चाहिए ऐसे इंतजाम 
कोचिंग संचालकों को फायर सेफ्टी के साथ-साथ बारिश के मद्देनजर भी सुरक्षा के इंतजामों पर ध्यान देना होगा। बच्चों के लिए कक्षाओं में प्रवेश एवं निर्गम के अलग-अलग द्वार की व्यवस्था करने, क्षमता से अधिक बच्चों को प्रवेश न देने, साफ -सफाई के समुचित इंतजाम करने तथा विद्युत फिटिंग एवं वायरिंग की समय समय पर जांच कराने चाहिए। कोचिंग संचालकों को कोचिंग क्लासेस के लिए ऐसे स्थानों या भवनों का चयन करना होगा जहां फायर ब्रिगेड आसानी से पहुंच सके। कोचिंग संस्थानों में लगे अग्निशमन यंत्रों को निरन्तर अपडेट रखना चाहिए। तय समय पर रिफिल कराने और अग्निशमन यंत्रों के संचालन के लिए स्टॉफ के सभी सदस्यों को प्रशिक्षित होना चाहिए। जर्जर भवनों में कोचिंग क्लासेस में संचालन ना किया जाए। 
ये है जरूरी
फस्र्ट एड- सबसे जरूरी फस्र्ट एड भी नहीं हैं। अगर किसी बच्चे को चोट आ जाए तो अस्पताल में ही इलाज मिल पाएगा।
जरूरी नंबर : छात्राओं के साथ पीछा करने, छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके बाद भी कोचिंग संस्थानों के पास कंट्रोल रूम और पुलिस के जरूरी नंबर भी नहीं हैं।
गेट : बच्चों को संस्थान से बाहर निकलने एक गेट ही हैं, वह भी सकरा, जबकि दो गेट होना चाहिए।
सीसीटीवी कैमरा: संस्थानों पर सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए, लेकिन अब तक जिन संस्थानों की जांच हुई है, उनमें से अधिकतर में सीसीटीवी कैमरा नहीं मिले। 
सुरक्षा गार्ड : कहीं भी सुरक्षा गार्ड नहीं मिले। बच्चे खुद ही अपने वाहनों को रखते और उठाते हैं।

Friday, 5 July 2019

सिवनी में पत्रकार बनाने की मशीन तो नहीं !
राष्ट्र चंडिका सिवनी. प्रदेश के कई जिलों में इनदिनों फर्जी पत्रकार बनने और बनाने का गोरख धंधातेजी से बढ़ता जा रहा है! सड़कों पर दिखने वाली हर चौथी गाड़ी में से एक गाड़ी में जरूर प्रेस लोगो दिखता नजर आ जाएगा! कई शहरों में अब तो पुलिस ने ऐसे फर्जी पत्रकारों के गैंग सहित उनकी बिना कागजात वाली गाड़िया भी सीज करनी शुरू कर उनके फर्जी आईडी प्रेस कार्ड के आधार पर मुकदमा भी लिखना शुरू कर दिया है! ये फर्जी पत्रकार अपनी गाड़ियों में बड़ा बड़ा प्रेस का मोनोग्राम तो लगाते ही है साथ ही फर्जी आईडी कार्ड भी बनवाकर अधिकारियो व लोगो को रौब में लेने का प्रयास भी करते है! कुछ संस्थाए तो ऐसी है जो 1000 रूपये से लेकर 5000 हजार रूपये जमा करवाकर अपनी संस्थान का कार्ड भी बना देती है और बेरोजगार युवकों को गुमराह कर उनसे धन उगाही करवाती है लेकिन पकडे जाने पर वो संस्थाए भी भाग खड़ी होती । लगातार बढ़ती फर्जी पत्रकारों की संख्या से न सिर्फ छोटे कर्मचारी से लेकर अधिकारी परेशान है बल्कि खुद समाज के सम्मानित पत्रकार भी अपमानित महसूस नजर आते है! कुछ फर्जी पत्रकार तो अपनी गाड़ियों के आगे पीछे से लेकर वीआईपी विजिटिंग कार्ड भी छपवा रखे है जो लोग पुलिस की चेकिंग के दौरान उनको प्रेस (मीडिया) की धौस भी दिखाते है। गाड़ी रोकने पर पुलिस कर्मी से बत्तमीजी पर भी उतारू हो जाते है। इनमे से तो बहुत से ऐसे पत्रकार है जो पेशे से तो भूमाफिया और अपराधी है। जिनपर न जाने कितने अपराधिक मुक़दमे भी दर्ज है लेकिन अपनी खंचाड़ा गाड़ी से लेकर वीआईपी गाड़ी पर बड़ा बड़ा प्रेस मीडिया छपवा कर मीडिया को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते! लेकिन अब ऐसे पत्रकारों को चिन्हित कर पुलिस विभाग के साथ साथ सम्मानित पत्रकार संघ अपमानित करेगा जो पत्रकारिता के चौथे स्तम्भ को बदनाम करेगा! ये कार्यवाही यू.पी.के कई जिलों में शुरू हो गयी है पत्रकारिता के नाम पर अपराधी किस्म के लोग पुलिस से बचने के बजाय अब जाएंगे जेल ! यह कार्यवाही उत्तराखण्ड मे भी होनी चाहिये इस कार्यवाही से फर्जी पत्रकार होंगे बेनकाब और अपराध मे भी आयेगी कमी । इस आदेश के मुताबिक प्रदेश सरकार के अनुरोध के हिसाब से राहत सिर्फ उन्हीं पत्रकारों को मिलेगी जिन पर या तो सरकार ने पत्रकार होने का ठप्पा लगा रखा है ..या सरकार लगाएगी....बाकी किसी को इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा.... इसका विरोध होना चाहिए....फील्ड में दिन-रात जो पत्रकार दौडते-भागते हैं उनमें से अधिकांश गैर मान्यता प्राप्त हैं.... वहीं हमारे सूत्रों की माने तो कुछ ऐसे भी तथाकथित पत्रकार हैं जो अपने काले धंधे को छिपाने के लिए पत्रकारिता में आये हैं। हम उनके नाम तो प्रकाशित नहीं करेंगे लेकिन यह बता देना चाहते हैं कि पत्रकारिता को बदनाम करने वाले ऐसे तथाकथित पत्रकारों पर गाज गिरनी चाहिए। सिवनी से प्रकाशित होने वाले अखबार के पूरे साल भर के रिकार्ड व आरएनआई की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी को मांगनी चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का हो सके। वहीं दूसरे जिले के अखबारों व चैनलो की एजेंसी लेने वाले पत्रकारों पर पैनी नजर रखते हुए उनसे अपाइनमेंट लेटर की भी जांच करनी चाहिए। यदि इस प्रकार की कार्यवाही शीघ्र ही नहीं की गई तो सिवनी जिले में और भी कई तथाकथित पत्रकार रोज पैदा होते रहेंगे जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।

Thursday, 4 July 2019




अपनी शादी की CD प्ले करते ही उड़ गए महिला के होश...
                                                                                    
अपने घर की सफाई कर रही महिला उस वक्त हैरान रह गई जब उसे 7 साल पहले हो चुकी अपनी ही शादी की एक सीडी मिली। इस सीडी में हैरान करने वाली बात यह भी थी कि महिला ने इन सात सालों में कभी भी इस सीडी को नहीं देखा था। इसके अलावा इस सीडी के ऊपर उसकी सास ने काफी गंदी हैंड राइटिंग में लिख रखा था 'बेटे की शादी के फोटो'।
ऐसा लिखा देखकर महिला को अजीब सी बेचैनी हुई और उसने उस सीडी को प्ले कर देखना उचित समझा। लेकिन, सीडी को प्ले करते ही मानो महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई। दरअसल, इस सीडी में कुल 400 फोटो स्टोर थीं, लेकिन इनमें से एक भी फोटो में वो खुद मौजूद नहीं थी। बता दें कि इस स्टोरी को सोशल मीडिया साइट mumsnet.com पर एक महिला यूजर ने CountryMarch नाम के यूजरनेम से पोस्ट किया था।जिस सास को महिला आज तक बहुत सम्मान देती आ रही थी, अचानक से इस सीडी को देखने के बाद उसका मन ही बदल गया। महिला ने सोचा कोई किसी के साथ ऐसा कैसे कर सकता है। कि जिसकी शादी हो रही है, वही उन फोटो में मौजूद नहीं है। दरअसल, ये सारी फोटोज इतनी चतुराई से ली गई थी कि इनमें से किसी भी फोटो में उस समय दुल्हन बनी यह औरत नजर नहीं आ रही थी।
इस बात से पूरे दिन परेशान रहने के बाद जब ये बात महिला ने अपने पति को बताई तो वह जोर-जोर से हंसने लगा। तब तक महिला को पता चल चुका था कि जरूर उसकी सास ने किसी फोटोग्राफर को अलग से पैसे देकर इन फोटोज को खींचने के लिए हायर किया था। जिनमें मैं ना दिखाई दूं। यही वजह थी कि पिछले 7 सालों से इस सीडी को छुपाकर रखा गया था।
जिले के अंदर की तबादला सूची जल्द जारी होंगी

राष्ट्र चंडिका सिवनी । जिले के अंदर स्थानांतरणों की सूची दो तीन दिन में ही जारी हो सकती है। विभागों के द्वारा इसके लिये प्रस्ताव बनाये जाकर जिला प्रशासन के जरिये प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के लिये प्रेषित कर दिया गया है। इन तबादलों में लेन देन की चर्चाएं भी तेजी से चल रही हैं। जिला प्रशासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने  को बताया कि लंबे समय से जिले के अंदर के तबादलों की सूची लंबित पड़ी हुई है। सूत्रों ने बताया कि बीते दिनों प्रभारी मंत्री के साथ जिला काँग्रेस कमेटी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी जबलपुर रोड स्थित एक होटल में बैठकर इसे अंमित रूप दे रहे थे कि अचानक ही यह बात तेजी से वायरल होने पर मामला ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया गया।सूत्रों का कहना है कि जिला काँग्रेस कमेटी के उन्हीं वरिष्ठ नेता के द्वारा अब सारे प्रस्तावों को लेकर पड़ौसी जिले में एकांतवास में इस पर चर्चा की गयी। चर्चा के बाद इस पर अंतिम मुहर लग गयी बतायी जा रही है। सूत्रों की मानें तो दो तीन दिन में ही जिले के अंदर अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों की सूची प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के उपरांत जारी हो सकती है।वहीं, सोशल मीडिया पर तबादलों विशेषकर शिक्षा विभाग के तबादलों को लेकर तरह – तरह की टिप्पणियां भी की जा रही हैं। काँग्रेस के अंदरखाने से छन-छन कर बाहर आ रहीं खबरों पर अगर यकीन किया जाये तो इस बार तबादलों में धड़ों में बंटी काँग्रेस के महज़ एक गुट को ही तवज्जो दी गयी है। असलियत क्या है, यह तो तबादला सूची के सार्वजनिक होने के बाद ही सामने आ सकेगी, पर तब तक चर्चाओं का बाज़ार जमकर गर्माया हुआ है।

Tuesday, 2 July 2019

आकाश विजयवर्गीय पर मोदी सख्त, बोले- किसी का बेटा हो, पार्टी से निकाल देना चाहिए

मध्य प्रदेश में निगमकर्मी की पिटाई मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्ती दिखाई है. भारतीय जनता पार्टी के बैटमार विधायक आकाश विजयवर्गीय का नाम लिए बिना पीएम मोदी ने कहा है कि वह चाहे किसी का भी बेटा क्यों न हो, उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए.

राष्ट्र चंडिका मध्य प्रदेश में निगमकर्मी की पिटाई मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्ती दिखाई है. भारतीय जनता पार्टी के बैटमार विधायक आकाश विजयवर्गीय का नाम लिए बिना पीएम मोदी ने कहा है कि वह चाहे किसी का भी बेटा क्यों न हो, उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए.
दिल्ली में बीजेपी संसदीय दल की बैठक में भारतीय जनता पार्टी के बल्लामार विधायक आकाश विजयवर्गीय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्ती दिखाई है. बिना नाम लिए पीएम मोदी ने कहा, 'किसी का भी बेटा हो, उसकी ये हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिन लोगों ने स्वागत किया है, उन्हें पार्टी में रहना का हक नहीं है. सभी को पार्टी से निकाल देना चाहिए.'
इस मामले पर बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा, 'कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय की घटना के मामले में प्रधानमंत्री नाराज हैं. उन्होंने कहा है कि ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है, चाहे वह किसी का बेटा हो, सांसद हो. अहंकार नहीं होना चाहिए. ठीक से व्यवहार करना चाहिए और ऐसे लोग पार्टी में नहीं होने चाहिए. हालांकि प्रधानमंत्री ने कैलाश विजयवर्गीय और उनके बेटे का नाम नहीं लिया.'
बता दें कि बीजेपी संसदीय दल की इस बैठक में कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल थे. आकाश भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं. इस मामले पर कैलाश विजयवर्गीय ने अपने विधायक बेटे आकाश को कच्चा खिलाड़ी बताया. कैलाश विजयवर्गीय ने कहा 'ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मुझे लगता है आकाश और नगर निगम के कमिश्नर दोनों पक्ष कच्चे खिलाड़ी हैं. यह एक बड़ा मुद्दा नहीं था, लेकिन इसे बहुत बड़ा बना दिया गया.'
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था 'मुझे लगता है कि अधिकारियों को अहंकारी नहीं होना चाहिए. उन्हें जनप्रतिनिधियों से बात करनी चाहिए. मैंने इसकी कमी देखी है. दोनों को समझना चाहिए, ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो.'
क्या था मामला
इंदौर में नगर निगम का दल गंजी कंपाउंड क्षेत्र में एक जर्जर मकान को गिराने पहुंचा था. इसकी सूचना मिलने पर विधायक आकाश विजयवर्गीय मौके पर पहुंचे, जहां उनकी नगर निगम के कर्मचारियों से बहस हो गई. तभी आकाश विजयवर्गीय क्रिकेट का बल्ला लेकर नगर निगम के अधिकारियों से भिड़ गए. विजयवर्गीय ने बल्ले से अफसरों की पिटाई भी की. इसके मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और जेल भी जाना पड़ा. हालांकि रविवार को आकाश जमानत पर रिहा हुए हैं.

Monday, 1 July 2019

शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर फसल वोने वालों की अब खैर नहीं
 अतिक्रमण कर फसल वोने वालों के विरूद्ध होगी सख्त कार्रवाई- चलेगा सघन अभियान सरकारी जमीन पर फसल वोने वालों को चेतावनी- नहीं बोयें फसल
नरसिंहपुर, 01 जुलाई2019.जिले में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर फसल वोने वालों की अब खैर नहीं। जिला प्रशासन द्वारा सघन अभियान चलाकर अतिक्रमण कर फसल वोने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी। इस आशय के निर्देश कलेक्टर दीपक सक्सेना ने सोमवार को समय सीमा की बैठक में दिये। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर फसल वोने वालों को चेतावनी दी गई है कि वे शासकीय भूमि पर कोई भी फसल नहीं वोयें, अन्यथा फसल हटवाकर संबंधित के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी।          बैठक में बताया गया कि जिले में शासकीय भूमि का सत्यापन कराने के लिए जून माह में अभियान चलाया गया। जिले में 12 हजार 565 खसरा नम्बरों की 7426.087 हेक्टर रकबे की शासकीय भूमि पर 14 हजार 282 अतिक्रामकों द्वारा कब्जा किया जाना पाया गया। इन अतिक्रमण करने वालों के विरूद्ध जिले में सघन अभियान चलाया जायेगा। शासकीय भूमि के सत्यापन के अनुसार तहसील नरसिंहपुर में 1029.786 हेक्टर रकबे पर 2336 अतिक्रामकों, करेली में 1175.735 हेक्टर रकबे पर 1756 अतिक्रामकों, गाडरवारा में 3843.681 हेक्टर रकबे पर 6377 अतिक्रामकों, गोटेगांव में 1002.98 हेक्टर रकबे पर 2663 अतिक्रामकों और तहसील तेंदूखेड़ा में 373.905 हेक्टर रकबे पर 1150 अतिक्रामकों द्वारा अतिक्रमण किया जाना पाया गया।          बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जावे कि पटवारी हल्का मुख्यालय पर संबंधित पटवारी अतिक्रमण करने वालों की सूची का वाचन करें। ग्राम पंचायतों में होने वाली जनसुनवाई के दौरान भी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वालों की सूची का वाचन किया जावे। इस सूची को ग्राम पंचायत में चस्पा भी कराया जावे। ये निर्देश सभी अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों, तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, राजस्व विभाग के अमले और संबंधित अधिकारियों को दिये गये। उन्होंने निर्देश दिये कि राजस्व न्यायालय में अतिक्रमण के सभी प्रकरण दर्ज करें। सप्ताह में कम से कम एक दिन अतिक्रमण से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई करें। आरसीएमएस में भी प्रकरण दर्ज किये जावें। पटवारीवार अतिक्रमण के प्रकरणों की रिपोर्ट बुलवाई जावे।
पंजीकृत श्रमिकों के भौतिक सत्यापन के लिए अभियान एक से 15 जुलाई तक
राष्ट्र चंडिका  नरसिंहपुर (अमर नोरिया)  01 जुलाई2019.राज्य शासन के निर्देशानुसार मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल योजना और मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों के सत्यापन के लिए एक से 15 जुलाई तक नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान चलाया जायेगा। यह जानकारी श्रम पदाधिकारी नरसिंहपुर ज्योति पांडे दुबे ने दी है।          इस सिलसिले में अभियान चलाकर अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाये जायेंगे, ताकि पात्र व्यक्तियों को वास्तविक रूप से शासन की योजना का लाभ मिल सके।          श्रमपदाधिकारी ने बताया कि श्रम सेवा पोर्टल से नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के पंजीकृत श्रमिकों की पंचायत एवं वार्डवार सूची लेकर इनका घर- घर जाकर सत्यापन कराया जायेगा। ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत सचिव और नगरीय क्षेत्र में वार्ड प्रभारी सत्यापन करेंगे। ये नोडल अधिकारी होंगे। प्रत्येक दिन सत्यापन के पश्‍चात अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाने की अनुशंसा नियमानुसार प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अगले दिन की जायेगी।          अभियान के दौरान सूची में दर्ज पात्र श्रमिकों में से जिनके आधार नम्बर उपलब्ध नहीं होंगे, उनके आधार नम्बर प्राप्त कर पोर्टल पर दर्ज किये जायेंगे। अभियान के दौरान उत्तराधिकारी के नाम, आधार नम्बर, मोबाइल नम्बर की जानकारी भी ली जायेगी। इस संबंध में जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। कंट्रोल रूम का टेलीफोन नम्बर 07792- 230309 है। इस टेलीफोन नम्बर पर अभियान के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। पंजीकृत श्रमिकों से आग्रह किया गया है कि वे सत्यापन के दौरान जानकारी देने में सहयोग प्रदान करें।