Saturday, 26 November 2016

ब्राम्हण समाज क्यों झेल रही हैं इन्हें

प्रौढ़ हो चले युवा अध्यक्ष बरगद नहीं बल्कि अजगर है समाज के
ब्राम्हण समाज क्यों झेल रही हैं इन्हें
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। ब्राम्हण समाज के चुनावों को लेकर अक्सर मीडिया में चर्चा होती रहती है और इस चर्चा के पीछे कौन लोग है इसका रहस्य हम आज खोल रहे हैं। कहते है बुजुर्ग बरगद के समान होते हैं और वे हमें भले ही कुछ ना दे लेकिन छाया स्वरूप मार्गदर्शन अवश्य प्रदान करते हैं लेकिन बुजुर्ग का स्वभाव अजगर की तरह हो जाये तो फिर समाज के पतन में ’यादा समय नहीं लगेगा यही स्थिति वर्तमान में समाज की बनी हुई है।
जिन बुजुर्गो को और युवाओं को समाज के उत्थान के लिए समाज ने दायित्व सौंपा था, उन लोगों ने पद में रहते हुए समाज को अपनी स्वार्थ सिद्धी का साधन बना लिया खासकर प्रौढ़ हो चले युवा अध्यक्ष एक ऐसी शख्सियत है जो पद से हटना भी नहीं चाहते और जो लोग पद में रहकर कार्य करना चाहते हैं उन्हें मौका भी नहीं देते, उनके साथ कुछ चाटुकारों की फौज भी है जो उनके डाले गये टुकड़ो पर उनकी भाटगिरी के लिये हमेशा तैयार रहती है।
मीडिया में समाज के दो रूपों में जीने वाले प्रौढ़ हो चले युवा अध्यक्ष कहने को तो ठेकेदार है मगर समाज के भवन का मामला हो या अन्य मामलो में वे हमेशा अपना लाभ देखने का प्रयास करते हैं। आखिर अध्यक्ष के पद से वे क्यों नहीं हटना चाहते? ब्राम्हण समाज एक प्रबुद्ध समाज रहा है जो अपने कर्मो से भलाई के कार्य के लिए अग्रणी माना जाता है। देश या समाज में कोई भी विषम परिस्थिति आयी इस समाज ने हमेशा अपनी उदारता का परिचय दिया लेकिन प्रौढ़ हो चले युवा अध्यक्ष एक ओर अपने आपको एक पार्टी की राजनीति से जुडक़र समाज पर यह छाप अंकित करने का प्रयास कर रहे हैं कि समाज का वोटबैंक उनके इशारे से चलता है, अगर इन्हें समाज विशेष अधिकारों के तहत नहीं हटाती तो आने वाले समय में वे समाज के लिए नासूर ना बन जायें। कभी पत्रकार, कभी समाजसेवी तो कभी ठेकेदारी का नकाब लगाकर समाज को गुमराह करना इनकी फितरत बन गयी है। ना तो ब्राम्हण समाज की तरह इनका अनुभव है और ना ही ज्ञान है, बेहतर है समाज चिंतन करते हुए इस दिशा में कदम उठाये। 

Friday, 25 November 2016

कर्मचारियों की धौंस से चलता है सोहाने पेट्रोल पंप

कर्मचारियों की धौंस से चलता है
सोहाने पेट्रोल पंप
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं शासकीय बस स्टैण्ड से प्रतिदिन हजारों वाहनों का आना जाना लगा रहता है और यह पेट्रोल पंप बस स्टैण्ड के बाजू में होने से दोनों दिशाओं से आने वाले वाहन टकराने की संभावना बनी रहती है।
नहीं रहती चिकित्सा व्यवस्था
नियमानुसार किसी भी पेट्रोल पंप में दुर्घटना की स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था होना चाहिए लेकिन सोहाने पेट्रोल पंप नियमों को ताक में रख इस नियम का उल्लंघन कर रहा है। आने वाले ग्राहकों के लिए यहां पर पेयजल की भी व्यवस्था ना होने से लोग परेशान देखे जाते हैं।
चिल्हर के नाम पर कालाबाजारी
जब से नोटबंदी के आदेश हुए हैं तब से ग्राहकों से चिल्हर नोट के नाम पर दबाव बनाया जाता है लोगों से एकत्र चिल्लर आखिर कहां जा रही है यह सवाल जनता आज जिला प्रशासन से पूछना चाहती है जबकि बैंको ने स्पश्ट निर्देश दिये हें कि पेट्रोल पंप में 500-1000 के नोट लिये जायेंगे लेकिन यहां पर 500 व 1000 के नोट के नाम पर पेट्रोल डालने का दबाव डाला जाता है।
नगर के सरकारी बस स्टैंड, के बाजू मे पेट्रोल पंप संचालित है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में दो पहिया व चार पहिया वाहन चालक पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए आते हैं। प्रत्येक पेट्रोल पंप पर आने वाले ग्राहकों के लिए नियमत: कुछ नि:शुल्क सेवाएं रखना आवश्यक है। इसके साथ ही हवा भरने की मशीन अनिवार्य रूप से रखना है, लेकिन अधिकांश पेट्रोल पंप में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही पंप में पेयजल व शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। पेट्रोल पंपों में सुविधा के अभाव के चलते वाहनधारियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वर्दी भी नहीं पहनते कर्मचारी
पेट्रोल पंपों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को वर्दी पहनना अनिवार्य रहता है, लेकिन जिले के कुछ पेट्रोल पंपों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश पेट्रोल पंपों में कार्यरत कर्मचारी वर्दी भी नहीं पहनते। कर्मचारी कंपनी की वर्दी में नहीं, बल्कि सादे कपड़ों में कार्य करते हैं जो नियम विरूद्ध है।
कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार
अक्सर यहां के कर्मचारियों द्वारा आने वाले उपभोक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। पुलिस में शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही इन पर नहीं की जाती ऐसा अनेक उपभोक्ताओं का कहना है जिससे यह प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन सोहाने पेट्रोल पंप को नहीं हटाने के पीछे कोई रहस्य छिपा है। जब शहर को सुंदर बनाने के लिये अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गयी तो फिर इस पेट्रोल पंप को इस कार्रवाही से क्यों वंचित रखा गया।
मशीन है, कर्मचारी नहीं
नहीं होती नियमित जांच
जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों में मिलावट कर पेट्रोल व डीजल बेचे जाने की अनेक शिकायत मिलने के बाद भी खाद्य विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। वहीं पेट्रोल पंपों में सुविधाओं का अभाव बना हुआ है जिसका निरीक्षण भी नहीं किया जाता। लोगों ने बताया कि मिलावट की जांच के लिए फिल्टर पेपर मांगने के बाद भी पंप संचालक उपलब्ध नहीं कराते, जबकि नियमानुसार ग्राहक को संदेह होने पर यह पेपर दिया जाना चाहिए। पेट्रोल पंपों में सुविधाओं की जांच के लिए खाद्य विभाग तो है, लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए। विभाग की ओर से पेट्रोल पंपों का सतत निरीक्षण नहीं किया जाता, जिसके चलते पंप संचालकों के हौसलें बुलंद है।
शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों में वाहन चालकों को घंटो लाइन लगानी पड़ती है। पेट्रोल पंप में पेट्रोल और डीजल के लिए कई मशीन तो है, लेकिन कर्मचारी के अभाव में केवल एक या दो ही पंप से पेट्रोल दिया जाता है। 

Monday, 21 November 2016

क्या ब्राम्हण समाज नहीं देगा युवाओं को मौका?

कब तक ढोते रहेंगे कुरीतियों को
युवा गढ़ सकते हैं नया
क्या ब्राम्हण समाज नहीं देगा युवाओं को मौका?
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। ब्राम्हण सदिया से हर जाति में पूज्यनीय रहे हैं भले ही अलग-अलग समाज में इन्हें अलग-अलग नाम दिया गया हो लेकिन वे प्रतिष्ठा पाते रहे हैं। सिवनी जिले में हिन्दु वर्ग को एकजुट रखने के लिये ब्राम्हण समाज के संगठन का गठन किया गया था और इस संगठन से अपेक्षा थी कि ये समाज को दिशा देने तथा समाज की दशा सुधारने में ब्रम्हास्त्र का काम करेगा लेकिन पद पर बैठे लोगों ने इस पद को अपनी बपौती समझ लिया है और अजगर की तरह कुण्डली मारकर बैठने के बाद हटना ही नहीं चाहते हैं।
वैसे तो लंबे समय से जिला ब्राम्हण समाज के प्रवक्ता अनेकों बार समाज के चुनाव को लेकर विज्ञप्तियां जारी करते रहे हैं। ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष पद पर लंबे समय से वृद्धो को ही दायित्व सौंपा जाता रहा है जिसके कारण समाज की गति कछुआ की तरह ही रही है लेकिन अब समय आ गया है कि नये युवाओं में संदीप उपाध्याय, अभिषेक दुबे, विक्रांत तिवारी, बाबा पाण्डे, विशाल तिवारी, दीपक तिवारी, रविंद्र तिवारी  जैसे युवाओं को दायित्व सौंपा जाये और वृद्धजनों को संरक्षक के रूप में दायित्व सौंपकर उनका मार्ग दर्शन लिया जाये। अब वह समय नहीं रहा जब ब्राम्हणों के आचार विचार से प्रभावित होकर लोग उन्हें चलती फिरती न्यायालय मानकर उनके अक्षरश: वाक्यों को जीवन में अंगीकार करते थे। आज का युवा आने वाले कल का भविष्य है अगर उसे आज समाज द्वारा मौका नहीं दिया गया तो कल हमें पछताना पड़ेगा, हर युवा की इच्छा होती है कि में समाज के लिये कुछ करूं और समय रहते उसे मौका मिलता है तो वह समाज का नया इतिहास भी रच सकता है। समाज पुरानी रूढ़ीवादी विचारधारा को त्याग आने वाले कल और आने वाली पीढिय़ों के कंधे पर समाज का बोझ सौंप उनकी पीठ मजबूत करें तभी यह नारा सार्थक होगा ब्राम्हण सर्वत्र पूज्यंते।