Sunday, 9 October 2016

नेताजी की अश्लील सीडी मामला पुलिस कब करेगी कार्यवाही ?



राष्ट्रचंडिका/नरसिंपुर/जबलपुर/अमर नौरिया। - संस्कारधानी के रूप में जाने जाना वाला मध्यप्रदेश का जबलपुर इन दिनों सोशल मीडिया में छाये एक वीडियो को लेकर अच्छी खासी चर्चा का विषय बना हुआ है ।  इस वीडियो में जबलपुर शहर के एक कांग्रेसी नेता का एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में एक कमरे के अंदर का वीडियो सोशल मीडिया में बायरल हो गया और इस से संबंधित खबरें सोशल मीडिया सहित कई मीडिया माध्यमों में सुर्खिया बनी हुई हैं और इस संबंध में कांग्रेस के अंदर खलबली मची हुई है । 
 सूत्रों की माने तो इस वीडियो के पीछे ब्लेैकमेंलिग किये जाने की बातें सामने आ रहीं है और इस आपत्तिजन वीडियो को लेकर एक महिला व युवती सहित कैमरामेन युवक लाखों रूपये वसूल भी कर चुके हैं  किंतु यहा वीडियो लीक कैसे हो गया इसके पीछे का असली सच क्या है इसको लेकर बताया जा रहा है कि संबंधित वीडियो लीक होने की वजह जो सामने आयी है वह यह कि यह वीडियो जिस मोबाइल सेट में था उसे सुधारने के लिये किसी दुकानदार को दिया गया था वहां से यह लीक कर दिया गया है । 
 वीडियों में आपत्तिजनक हालत में युवती के साथ दिखाई दे रहे नेताजी जबलपुर के प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों से भी जुड़े रहें हैं और इस संबंध में उक्त संस्थानों की समिति की भी आनन फानन में एक बैठक बुलाकर इस पूरे मामले को लेकर चर्चा भी हो चुकी है ।  वहीं इस पूरे मामले में पुलिस के द्वारा कोई कार्यवाही न किये जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ है ओर पुलिस भी इस पूरे मामले को कांग्रेसी नेता से जुड़ा होने को लेकर अपनी ओर से किसी प्रकार की रिस्क नहीं ले रही है  लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि अक्सर पार्कों,होटलों में अचानक छापामार कार्यवाही कर आपित्तजनक हालत में लड़का लड़कियों को पकड़कर उन्हें नैतिकता के बहाने कार्यवाही करने वाली पुलिस इस पूरे प्रकरण मे सोशल मीडिया में आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद संबंधित पक्षों से पूछताछ व कार्यवाही करने से अभी तक परहेज क्यों कर रही है 

क्या गरबा समितियां देगी चंदे का हिसाब

क्या गरबा समितियां देगी चंदे का हिसाब
                 सायकल स्टैण्ड के भी वसूलते हैं पैसे,
                    गरबा की आड़ में पनपती है बुराईयां
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। मां दुर्गा की आराधना का पर्व नवरात्रि में भक्ति के लिये लोगों ने गरबा को माध्यम बनाया और कुछ वर्षो तक गरबा पवित्र भावना के साथ खेला जाता रहा है लेकिन आज इस गरबाकी झलक भी नहीं दिखती क्योंकि गरबा की रासलीला का स्वरूप ही परिवर्तित हो गया है जिसका जो समझ में आता है गरबा प्रशिक्षण के नाम पर अपनी दुकान खोल लेते हैं और युवा बालिकाओं व बालकों को गुमराह करते हैं।
इस वर्ष गरबा प्रशिक्षण के नाम पर नगर की कुछ प्रशिक्षण प्राप्त करने वालो ने नगर के संभ्रात लोगों से आयोजन के नाम पर अच्छा खासा चंदा बटोरा और इस चंदे में प्रशिक्षण देने वालों ने एक कमेटी बनाकर राशि वसूल कर राशि का बंदरबांट तक किया।
हम यहां पर बताना चाहते हैं कि चार माह पहले से इन संस्थाओं द्वारा गरबा का प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया जाता है। संभ्रात परिवार की महिलायें गरबा सीखने के लिये घरों से निकलती है और गरबा सीखने के साथ साथ समाज की अनेक बुराईयो को भी अपने साथ लेकर आती है जिसके कारण गरबा की आड़ में विकृतियां फलती फूलती हैं लेकिन इस ओर ना तो कोई बोलने का साहस करता है और ना ही जिला प्रशासन ही इन पर अंकुश लगाता है।
गरबा प्रशिक्षण हो या महोत्सव इनके नाम से वसूला जाने वाला चंदा या उपयोग एवं आय व्यय का ब्यौरा लेने का दुस्साहस कोई नहीं करता है। क्या आयोजन समिति का दायित्व नहीं बनता कि वे गरबा से प्राप्त आय व्यय प्रस्तुत कर अपने कार्यो में पारदर्शिता लाये लेकिन हमे विश्वास है कि जिस दिन आय व्यय का ब्यौरा पेश किया जाने लगेगा उस दिन हमारे द्वारा जो बाते कही जा रही है उन बातों को भी समाज के लोग सही मानने लगेंगे। कहते हैं सच उस कड़वी दवा की तरह होता है जो कड़वी होने के कारण बीमार को भी स्वस्थ्य कर देती है। यही स्थिति गरबा महोत्सव की है। अगर समय रहते इस पर विचार नहीं किया गया तो बाद में पछताना पड़ेगा।
लगभग सात-आठ दिनों से अनेक स्थानों में चल रहे गरबा महोत्सव को पारिवारिक महोत्सव का नाम दिया जाता है लेकिन आयोजक दोपहिया चौपहिया वाहनों में आने वाले परिवार के लोगों से पार्किंग चार्ज, प्रवेश शुल्क तथा रसीद काटने में भी पीछे नहीं रहते।
इनकी यह स्थिति को देखकर ऐसा लगने लगा है कि मानो गरबा के नाम पर इन गरबा प्रशिक्षकों को लूटने की खुली छूट दे दी गयी है। समय की मांग है कि समाज अब गरबा प्रशिक्षकों से आय व्यय का हिसाब मांगे । हमारा गरबा के भक्ति स्परूप में आ रही बुराईयों की ओर ध्यान आकर्षित करने के पीछे यही उद्देश्य है कि मां भवानी की तपस्या का यह पर्व गरिमा और शालीनता के साथ मनाया जाये ना कि लोग इसे अपनी उदर पूर्ति का साधर बनाये।