Friday, 13 January 2023

*हीरोपंती 2 के चैनल प्रीमियर में देखिए टाइगर श्रॉफ का एक्शन, स्वैग और पावर-पैक्ड स्टंट्स, 14 जनवरी को एंड पिक्चर्स पर!*

 

“टाइगर ढूंढने से नहीं किस्मत से मिलता है!” बॉलीवुड के असली एक्शन हीरो टाइगर श्रॉफ का स्वागत करने के लिए तैयार हो जाइए, जो इस वीकेंड 14 जनवरी को एंड पिक्चर्स पर होने जा रहे पॉपुलर फिल्म 'हीरोपंती 2' के चैनल प्रीमियर के साथ हमारे दिलों और हमारे टेलीविजन स्क्रीन्स पर एक सीटीमार एंट्री करने जा रहे हैं। यह बेहद चुस्त और फुर्तीले हीरो हमारी आंख के तारे हैं, जो अपने सीटीमार डायलॉग्स और पावर-पैक्ड स्टंट्स के साथ हमारा मनोरंजन करेंगे। अहमद खान के निर्देशन में बनी इस एक्शन फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी और खूबसूरत एक्ट्रेस तारा सुतारिया भी खास रोल्स में नजर आएंगे।

बबलू राणावत के रोल में टाइगर श्रॉफ अपनी किक्स, पंचेस और धमाकेदार स्टंट्स के साथ बेमिसाल विलेन लैला (नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी) का डटकर मुकाबला करेंगे। अपनी प्रतिभा, अनोखे अंदाज़ और एक्टिंग कुशलता के लिए मशहूर नवाज़ुद्दीन ने इस फिल्म में एक साइबर-क्राइम मास्टरमाइंड के रोल में एक बार फिर दर्शकों का जमकर मनोरंजन किया है। यह फिल्म बबलू की कहानी है, जो लैला के कहर से दुनिया को बचाने निकला है। उधर लैला अब तक की सबसे बड़ी लूट को अंजाम देने के मिशन पर है, और ऐसे में वो भी बबलू को कड़ी टक्कर देगा।

हैरतअंगेज एक्शन और रोंगटे खड़े कर देने वाली रफ्तार के साथ-साथ 'हीरोपंती 2' में शांत मिज़ाज और शानदार एक्ट्रेस तारा सुतारिया भी इनाया के रोल में हैं, जो अपने खास आकर्षण से इस फिल्म में चार चांद लगा देती हैं। तमाम भागदौड़ और मजेदार कहानी के साथ हीरोपंती के फैंस को इस फिल्म में एंटरटेनमेंट का एक और धमाका पेश किया जाएगा, जहां हीरोपंती की एक्ट्रेस कृति सैनन एक बार फिर हमारे अपने टाइगर के साथ 'व्हिसल बजा' गाने की जबर्दस्त धुन पर थिरकती नजर आएंगी।

*तो आइए, आप भी हीरोपंती 2 के एक्शन-पैक्ड चैनल प्रीमियर का हिस्सा बन जाइए, 14 फरवरी को रात 8 बजे, सिर्फ एंड पिक्चर्स पर।*

*'आर या पार' में अपनी शानदार परफॉर्मेंस से लगातार फैंस का दिल जीतने वाली पत्रलेखा की 2023 की शुरुआत धमाकेदार रही है*




 बीते दिनों रिलीज़ हुई 'आर या पार' वेब सीरीज़ में पत्रलेखा द्वारा निभाई गई शानदार भूमिका फैंस और दर्शकों से खूब तारीफें बटोर रही है। 'संघमित्रा' के रूप में पत्रलेखा का किरदार लाजवाब है, जो निश्चित रूप से एक सहज डॉक्टर के रूप में सभी को आकर्षित करती है, जिसके ऊपर एक पूरी जनजाति की रक्षा करने का जिम्मा है। पत्रलेखा ने किरदार को इतनी अच्छी तरह से निभाया है कि शो देखते समय दर्शक उनकी चुनौतियों को महसूस कर सकते हैं। हाल ही में सीरीज़ ने 4.6 मिलियन व्यूज़ हासिल करके एक नया मुकाम हासिल किया है और रिलीज़ होने के महज़ दो सप्ताह के भीतर इस आँकड़े को पार करने वाली पहली वेब सीरीज़ बन गई है। इसने आईएमडीबी पर 7.8/10 की जबरदस्त रेटिंग भी हासिल की है।

सिद्धार्थ सेनगुप्ता के निर्देशन में बनी इस सीरीज़ में आदित्य रावल और पत्रलेखा मुख्य भूमिकाओं में हैं, जिसमें पत्रलेखा 'संघमित्रा' नाम के एक डॉक्टर की भूमिका निभा रही हैं। इस तरह के एक विशिष्ट किरदार को निभाने पर पत्रलेखा ने कहा, "संघमित्रा के कंधों पर हजारों आदिवासियों को बचाने की जिम्मेदारी है। मेरे लिए यह भूमिका निभाना एक शानदार अनुभव रहा है। जब मैंने पहली बार स्क्रिप्ट सुनी, तो मैं तुरंत इस किरदार की सहजता और साहस के प्रति आकर्षित हो गई थी। सीरीज़ की सफलता ने वर्ष 2023 के शुरुआती दौर को मेरे लिए बेहद खास बना दिया है। मैं आने वाली सभी प्रशंसाओं के लिए आभारी हूँ।"

पत्रलेखा के लिए वर्ष 2022 व्यस्तता से काफी भरा हुआ रहा है, जो कि वर्ष 2023 में भी बरकरार नज़र आ रहा है। उनके पास लव रंजन की एक फिल्म, मानवी गगरू के साथ एक फिल्म, सावित्रीबाई फुले पर एक बायोपिक, एमेज़न प्राइम पर गुलकंद टेल्स और कतार में कुछ और प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं।

Thursday, 12 January 2023

देखिए नीना गुप्ता की अवॉर्ड-विनिंग फिल्म ‘द लास्ट कलर’ का वर्ल्ड एचडी प्रीमियर, एंड पिक्चर्स एचडी पर

 

देखिए नीना गुप्ता की अवॉर्ड-विनिंग फिल्म ‘द लास्ट कलर’ का वर्ल्ड एचडी प्रीमियर, एंड पिक्चर्स एचडी पर

"सूरज तो रोज ही जीतता है, चांद का भी तो दिन आता है ना!" बेहतरीन फिल्म 'द लास्ट कलर' का यह झकझोर देने वाला डायलॉग हमारे दिलों में कई भावनाएं जगा देता है और हमारे चेहरों पर मुस्कान बिखेर देता है। यह आज की भागदौड़ भरी दुनिया में हमें उम्मीद की रोशनी दिखाता है। एंड पिक्चर्स एचडी 12 जनवरी को रात 8 बजे अवॉर्ड-विनिंग फिल्म 'द लास्ट कलर' का वर्ल्ड एचडी प्रीमियर दिखाने जा रहा है। फिल्मकारवां द्वारा प्रोड्यूस और मिशेलिन स्टार शेफ विकास खन्ना के द्वारा निर्देशित की गई 'द लास्ट कलर' आपके दिलों में जगह बनाने और आपको ढेर सारी भावनाओं और उत्साह के सफर पर ले जाने के लिए तैयार है।

बनारस की पृष्ठभूमि में रची-बसी यह फिल्म भारत में वृंदावन और वाराणसी की विधवाओं से जुड़े बरसों पुराने रीति-रिवाजों पर आधारित है। 'द लास्ट कलर' नूर (नीना गुप्ता) नाम की एक विधवा का सफर दिखाती है, जिसमें एक प्यारी-सी नन्हीं बच्ची छोटी (अक्सा सिद्दिकी) के साथ उसके रिश्ते का ताना-बाना बुना गया है। इसमें दिखाया गया है कि छोटी किस तरह नूर की ज़िंदगी में प्यार, उमंग और ढेर सारे रंग लेकर आती है। बेहद प्रतिभाशाली और खूबसूरत अभिनेत्री नीना गुप्ता ने बड़े सहज और प्रभावी ढंग से नूर का किरदार निभाया है। अपने हर किरदार में पूरी तरह रम जाने वाली नीना गुप्ता को हर उम्र के दर्शक प्यार से 'नीना जी' कहकर बुलाते हैं। उनका अपनापन, ज़िंदगी के प्रति उनका सरल नज़रिया और अपने किरदारों के प्रति गहरी लगन हम में उन्हें और देखने की चाहत जगाती है।

डायरेक्टर विकास खन्ना लोगों के बीच बेहद खास और दिलचस्प कॉन्टेंट परोसने के लिए जाने जाते हैं। शेफ से डायरेक्टर बने विकास अपनी फिल्म के हर पहलू का मज़ा लेते हैं और इसे दर्शकों के लिए मज़ेदार और उनकी ज़िंदगी का एक खास अनुभव बनाने के लिए अपना दिल लगा देते हैं। 

इस फिल्म के वर्ल्ड एचडी प्रीमियर को लेकर विकास खन्ना ने कहा, "द लास्ट कलर एक ऐसी फिल्म है, जो मेरे दिल और मेरे बचपन के बहुत करीब है। यह फिल्म किसी की पसंदीदा डिश की तरह आनंद लेने के लिए बनाई गई है। यह एक ऐसा सफर है, जो आपको एक अद्भुत अनुभव कराएगा। इस तरह की भावनाओं और ऐसे दमदार किरदार को सामने लाना निश्चित तौर पर चैलेंजिंग था लेकिन इस किरदार को निभाने और इसे अपना बनाने के लिए नीना गुप्ता से बेहतर भला और कौन हो सकता था।‌ जब हम शूटिंग कर रहे थे, तब उन्होंने बहुत-से इनपुट्स देकर बहुत मदद की। इस फिल्म का हर सीन बहुत सोच-समझकर रचा गया है और हमारा उद्देश्य यह था कि हम दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दें और रंगों के त्यौहार होली के जरिए एक विधवा के पूरे एहसास को सामने लाएं। मेरी दिली ख्वाहिश थी कि यह फिल्म ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचे और मुझे खुशी है कि मेरे डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर फिल्मकारवां ने यह संभव कर दिखाया। इसके अलावा मुझे एंड पिक्चर्स एचडी पर इस फिल्म के प्रीमियर का इंतजार है और उम्मीद है कि दर्शक इस फिल्म को पसंद करेंगे।"

इस फिल्म के वर्ल्ड एचडी प्रीमियर के बारे में चर्चा करते हुए नीना गुप्ता कहती हैं, "जब मैंने इस फिल्म की स्क्रिप्ट सुनी, तो मेरे अंदर बहुत-सी भावनाएं उमड़ पड़ीं। मैं चाहती थी कि पूरी दुनिया इस कहानी को देखे। मुझे खुशी है कि विकास ने दर्शकों को इतना खूबसूरत विशन दिखाया। उनके साथ काम करना वाकई ताज़गी भरा और रचनात्मक रूप से संतुष्टि देने वाला अनुभव था। हर सीक्वेंस अपनी-अपनी तरह से चैलेंजिंग था, जिसने एक एक्टर के रूप में मुझे अपनी कमजोरियों को टटोलने का मौका दिया। इस फिल्म की शूटिंग बनारस के घाट पर हुई थी, जो वाकई एक यादगार अनुभव था। खास बात यह है कि यह फिल्म मेरे किरदार नूर और एक 9 साल की लड़की की खूबसूरत दोस्ती दिखाता है, जिसका रोल अक्सा सिद्दिकी ने निभाया है। मैं उम्मीद करती हूं दर्शकों को यह फिल्म देखने में मजा आएगा।"

देखिए ‘द लास्ट कलर’ का वर्ल्ड एचडी प्रीमियर, 12 जनवरी को रात 8 बजे, एंड पिक्चर्स एचडी पर।

अब मध्य प्रदेश में होगी वास्तविकता की बात, वाभापा को मिलेगा जनता का साथ – डॉ वरदमूर्ति मिश्र

हर घर काम योजना को बनाएंगे सफल

भोपाल 10.01.2023: मध्य प्रदेश की सियासत के लिए साल 2023 कई मायनों में अहम होने वाला है। नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव, भाजपा-कांग्रेस जैसेदिग्गजों के लिए कुछ नई समस्याएं और चुनौतियां लेकर आ रहा है। प्रदेश में तेजी सेउभर रहीं क्षेत्रीय या छोटी पार्टियां, तीसरे दल के रूप मेंबड़ी चुनौतियां देने को तैयार हैं। साल के अंत में होने वाले प्रदेश के सियासीघमासान में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादीपार्टी के साथ-साथ पूर्व आईएएसअधिकारी डॉ वरदमूर्ति मिश्र की वास्तविक भारत पार्टी भी दमख़म दिखाने की तैयारी कररही है। 26 वर्षों से अधिक केप्रशासनिक अनुभव के साथ राजनीति में कदम रखने वाले डॉ वरदमूर्ति मिश्र सभी 230सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों को उतारने की घोषणा पहले हीकर चुके हैं।राज्य प्रशासनिक सेवा के 1996 बैच के डिप्टी कलेक्टर रह चुके, वाभापा संस्थापक वअध्यक्ष डॉ वरदमूर्ति मिश्र ने कहा, "सन 1956 में मध्य प्रदेश केगठन के बाद से, प्रदेश की सेवा करनेका मौका सिर्फ दो ही राजनीतिक दलों को मिला है। विगत वर्षों में प्रदेश की प्रगतिव उन्नति के लिए कई काम भी हुए हैं, लेकिन अब समय बदलावका है। अब समय अनुभव के साथ नई सोच और युवा जोश को धरातल पर काम करने की आजादीदेने का है, जो नवाचार के साथ-साथ प्रदेश को शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में मजबूत बना सकें। हमने हर घर कामपहुंचाने की योजना बनाई है। वाभापा में हम राजनीति के साथ कानून, मीडिया, तकनीक, शासन प्रशासन या सामाजिक आर्थिक मामलों के जानकारों के साथ, जनसेवा से जुड़ रहे हैं, ताकि समाज के विभिनक्षेत्रों और वर्गों को उचित उम्मीदवार के साथ सेवा का अवसर मिल सके।"जनता के बीच रहकर काम करने वाले अधिकारी की छवि के साथ डॉ वरदमूर्ति मिश्र नेविभिन्न जिलों में टीम गठन करना शुरू कर दिया है। पार्टी हर स्तर पर, साफ सुथरी छवि वाले, पढ़े लिखे प्रतिष्ठितव्यक्तियों को अपने साथ जोड़ रही है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि प्रदेश मेंसरकार गठन में वास्तविक भारत पार्टी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। चूंकि प्रदेशमें सरकार पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। शिक्षित युवा बेरोजगार काम न मिलने सेप्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। करोड़ों रुपए से प्रदेश में सरकारी अस्पताल बन रहे हैंलेकिन आधे से अधिक मेडिकल स्टॉफ और डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। ऐसे अन्य तमाममुद्दों के साथ पार्टी, प्रदेश की सभी सीटोंपर अपनी उम्मीदवारी पेश करने की कवायद में लग गई है।वाभापा ने 2022 में व्यवस्थापरिवर्तन का एक संकल्प लिया और जनता से मिले भरपूर समर्थन ने इस संकल्प को और अधिकमजबूत बना दिया है। पार्टी का मानना है कि 2023 परिवर्तन का वर्ष है और प्रदेश की जनता ने इस बार परिवर्तन का मन पक्का करलिया है।

काला अक्षर इंसान बराबर.....

 काला अक्षर इंसान बराबर.....

-अतुल मलिकराम (समाजसेवी)

कल शाम खुद के साथ समय बीता रहा था, तो मन में ख्याल मुहावरों के आने लगे, जिनका उपयोग हम इंसान अक्सर अपनी बात का वजन बढ़ाने के लिए किया करते हैं। एकाएक ही मन अलग दिशा में चला गया कि इंसान अपनी बात को मजबूत करने के लिए बेज़ुबान तक को भी नहीं छोड़ता है। ऐसे हजारों मुहावरे भरे पड़े हैं, जिन्हें बोलते समय इन निर्दोषों को हम क्या कुछ नहीं कह जाते हैं। और आज से नहीं, कई वर्षों से ही कहते चले आ रहे हैं। फिर मन में एक टीस उठी कि जिन जानवरों की आँखों में से कई दफा आँसू छलक पड़ते हैं, तो उन्हें ठेस भी तो पहुँचती ही होगी न, बोल नहीं सकते हैं तो क्या, भावना तो उनमें भी हैं न..... 

एक जानवर, जिस पर हम दिन भर में एक बार तो टिप्पणी कर ही डालते हैं, वह है भैंस। जिसकी लाठी, उसकी भैंस; अक्ल बड़ी या भैंस; गई भैंस पानी में; भैंस के आगे बीन बजाना; काला अक्षर भैंस बराबर और भी न जाने क्या-क्या। ताकत से अपना काम बना लेने वाले की तुलना भैंस से, शारीरिक शक्ति की अपेक्षा बुद्धि की अधिकता की तुलना भैंस से, बना बनाया काम बिगड़ने की तुलना भैंस से, निरर्थक काम की तुलना भैंस से, अनपढ़ की तुलना भैंस से, मुझे आज तक समझ नहीं आया कि भैंस ने इंसान का बिगाड़ा क्या है। दैनिक जीवन में गाय से अधिक मात्रा में भैंस के दूध का सेवन करता है, यह देखते हुए मुझे यह कहने में ज़रा भी संकोच नहीं है कि जिस थाली में खाता है, उसी में छेद करता है इंसान। ज़रा सोचिए, हम और आपकी तरह यदि ये बेज़ुबान भी बोल पाते और बदले में इंसान को कुछ यूँ उपाधि दे जाते कि काला अक्षर इंसान बराबर, तो कैसा जान पड़ता। एक पढ़े-लिखे व्यक्ति को कोई अनपढ़ कहेगा, जो ज़रा सोचकर देखिए कि कैसा लगेगा। नज़दीक से मदमस्त गुजरती भैंस यदि आपको बेवजह कहती हुई निकल जाती कि भाई! ज़रा बताना, अक्ल बड़ी या इंसान। मुझे तो लगता है कि हमारे क्रोध का तो ज्वालामुखी ही फूट पड़ता। 

बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद; अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे; हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और; ऊँट के मुँह में जीरा; घोड़ा घास से दोस्ती करेगा, तो खाएगा क्या; अपना उल्लू सीधा करना; घोड़े बेचकर सोना; अपने मुँह मियाँ मिट्ठू; अक्ल के घोड़े दौड़ाना; नाक पर मक्खी न बैठने देना; धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का; कुत्ते की दूम, टेढ़ी की टेढ़ी; मगरमच्छ के ऑंसू बहाना; अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है; कुत्ते को घी हजम नहीं होता और भी न जाने कितने ही मुहावरे हैं, जो बेज़ुबानों को इंसान से नीचे दिखाने का काम करते हैं। 

इंसान हमेशा अपने से कमजोर पर ही आज़माइश करता है। मैं ऐसा मानता हूँ कि इंसान के अलावा दिखावा करने का अवगुण किसी में नहीं होता है, फिर भी हाथी को बदनाम कर रखा है यह कहकर कि उसके खाने के दाँत और है व दिखाने के और। मेरे मायने में तो मगरमच्छ के आँसू मुहावरे में भी फेरबदल करने की जरुरत है, क्योंकि इंसान से अधिक दिखावटी आँसू मुझे नहीं लगता कि कोई अन्य प्राणी बहाता होगा। 

जाने-अनजाने में एक इंसान के मुँह से किसी दूसरे इंसान के लिए अपशब्द निकल जाते हैं, तो वह रौब झाड़ते हुए यह तो कह ही देता है कि तू जानता है मैं कौन हूँ। लड़ाई-झगड़ा कर या कॉलर पकड़कर उसे इस बात का एहसास तो दिला ही देता है कि उस शख्स ने गलत किया है। खुद को सबसे ऊपर समझने वाले इंसान को देखते हुए मैं तो कहता हूँ कि अच्छा ही हुआ जो प्रभु ने इन जानवरों को जुबां नहीं दी, नहीं तो उनके लिए हमारे द्वारा अपशब्दों का प्रयोग किए जाने पर जब वे अपनी ताकत की आज़माइश हम पर करते न, तो तमाम मुहावरे उनके चार पैरों के नीचे कुचल जाते। यकीन मानिए उनके पास जुबां नहीं है, लेकिन वे समझते सब हैं। तो कोशिश करें कि अपनी बात को वजनदार बनाने के लिए अन्य प्राणी को नीचे न गिराएँ।