Sunday, 19 June 2022

भाजपा के हाथ से निकल सकती है बाजी

 



राष्ट्र चंडिका,सिवनी । नगरीय  निकाय के चुनाव में जिस तरह की टिकट वितरण की गई है उससे स्पष्ट झलक रहा है कि एक पार्टी ने सत्ता में रहते हुए हाथी की तरह मदमस्त  रहते हुए उन युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दिया है जिन्होंने भाजपा कार्यालय की चौखट तक नहीं चढ़ी और उनकी सदस्यता तक नहीं है ऐसे में ऐसा संभव नहीं लगता पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों की पार्टी कहलाने वाली पार्टी उस समय कार्यकर्ताओं को भूल जाती है जब उन्हें टिकट देने की बात आती है शेष समय झंडा लगाने, पोस्टर लगाने, दरी बिछाने का काम इन कार्यकर्ताओं को सौंपा जाता है।

         हाल ही में क्लब के सफेद कपड़े पहनने वाले पैराशूट नेताओं की भरमार नजर आ रही है इन नेताओं को जिन स्थानों से टिकट दिया गया है वहां से इनके पराजय की शत प्रतिशत संभावना बनी हुई है। वर्तमान अध्यक्ष ने टिकट वितरण के दौरान अपना भविष्य देखते हुए किट का वितरण किए जाने की बात पार्टी में जन चर्चा का विषय बनी हुई है।
          वर्तमान में कार्यकर्ता यह कह रहे हैं कि ' मुंह में राम बगल में छुरी' जिन कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें वह टिकट दिलवा आएंगे अब अध्यक्ष या कह रहे हैं कि मैंने तो नाम भेजा था मगर विधायक सांसद एवं पूर्व विधायक एवं पूर्व अध्यक्ष ने अपने प्रत्याशियों के नाम आगे लाकर मेरे नाम पर आपत्ति लगाई जिससे उनके समर्थकों को टिकट नहीं मिला।
          भाजपा सूत्रों का कहना है कि टिकट चयन समिति में भले ही अनेक लोगों थे मगर पार्टी की ओर से टिकट वितरण की सूची अध्यक्ष नहीं बनवाई है और विधायक ने एक भी नाम परिवर्तन नहीं किया सब कुछ निर्णय अध्यक्ष ने लिया है नाम वापसी की तिथि नजदीक है मगर आक्रोश के चलते दी गई टिकट के प्रत्याशियों को हराने के लिए अभी से रणनीति में जुट गए हैं यह आक्रोश थमेगा ऐसा लगता नहीं है।
             नगर के 07 वार्डों में एक विशेष समुदाय का वाहुल्य है जहां से भाजपा को परास्त मिलने की संभावना है इसी तरह महिलाओं और आरक्षित वार्डों में पार्टी ने कोई ऐसे कार्यकर्ता को टिकट नहीं दिया जिसके चलते भाजपा शिखर से शून्य पर पहुंच गई है।
          बूथ में मतदान कराने के लिए भी इस बार पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ता मिलेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं वही जिस वार्ड में भाजपा के पुराने पार्षद रहे उन्होंने क्षेत्र में काम ना कर भाजपा का जनाधार भी खो दिया है और शेष कसर नगर पालिका अध्यक्ष रही भाजपा महिला ने पूरी कर दी थी।
        वर्तमान के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं का गिरता मनोबल भाजपा के पतन का अंदेशा है जिस पर विचार करने की आवश्यकता है लेकिन इस बार तो बाजी भाजपा के हाथ से निकल चुकी है। और भाजपा के लिए आगे की राह नंगी तलवार पर नंगे पैर चलने जैसी है कोई चमत्कार है जो भाजपा को इस समय उबार पाये।

Wednesday, 15 June 2022

चुनावों ने बढ़ाई बाजार में रौनक, प्रचार सामग्री की कीमतों में उछाल

 


राष्ट्र चंडिका सिवनी । पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की वजह से मध्यप्रदेश में प्रचार जोरों पर है। इसी को देखते हुए प्रचार सामग्री की दुकानें खुल गई हैं। इंदौर के राजवाड़ा समेत आसपास के इलाकों में ऐसी करीब एक दर्जन दुकानें हैं, जो थोक और फुटकर प्रचार सामग्री की बिक्री करती हैं. लिहाजा सिवनी के ग्रामीण अंचल समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी मात्रा में प्रचार सामग्री  से भेजी जाती है। इस बार नगरीय निकाय चुनावों के पहले पंचायत चुनाव हो रहे हैं, इसलिए पहली बार इन दुकानों पर पंचायतों के चुनाव के लिए प्रचार सामग्री तैयार हुई है।

महंगे दामों में बिक रही प्रचार सामग्री

इस बार पंचायत चुनाव की सामग्री में स्टीकर, गमछे, टोपी, छोटे झंडे और पंपलेट शामिल हैं। ये सरपंच पद के प्रत्याशियों द्वारा सीमित मात्रा में तैयार कराए गए हैं। इसके अलावा यदि चुनाव चिन्ह एक जैसे हैं तो अन्य पंचायतों के दावेदारों को भी यह सामान सप्लाई हुआ है। हालांकि अब चुनावी रंग जिलों में जमने लगा है तो प्रचार सामग्री के दुकानदारों की भी कोशिश है कि बीते 2 सालों में जो चुनाव नहीं हुए उनमें अब प्रचार सामग्री की बिक्री करके नुकसान की भरपाई कर ली जाए। यही वजह है कि प्रचार सामग्री को इस बार तुलनात्मक रूप से महंगे दामों पर बेची जा रही है।

Friday, 10 June 2022

कैसे बचेगी (पत्रकारिता) लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ?

अपराधियों का पत्रकारिता की ओर रुख समाज के लिए खतरा

राष्ट्र  चंडिका,ग्लैमर की चाह और पुलिस-प्रशासन के बीच भौकाल गांठने के लिए जहां पहले अपराधी किसी राजनीतिक हस्ती या पार्टी का दामन थाम लेते थे, वहीं वर्तमान में ये ट्रेंड बदल गया है। तमाम अपराधी प्रवृत्ति के लोग अब पत्रकारिता और वकालत की तरफ रुख कर रहे हैं। परन्तु वकालत की डिग्री में लगने वाले समय और जरूरी पढ़ाई की वजह से पत्रकारिता वर्तमान में अपराधियों का सबसे पसंदीदा क्षेत्र बनता जा रहा है।इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ वेब, पोर्टल और सोशल मीडिया जैसे दूसरे साधन आ जाने के बाद कोई भी शख्स कभी भी खुद को छायाकार या पत्रकार खुद ही घोषित कर दे रहा है। दुखद पहलू ये है कि जिस पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, उसमें कभी बुद्धिजीवी और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा लिए लोग आते थे, जबकि आज अंधाधुंध अखबारों, पत्रिकाओं, वेब पोर्टल्स के आ जाने के बाद बड़ी संख्या में अपराधियों को भी 'प्रेसÓ लिखने का सुनहरा मौका मिल गया है। इसके सहारे वो न सिर्फ़ अपने पुराने अपराधों को छुपाए हुए हैं, बल्कि नये अपराधों को भी जन्म देकर, पुलिस और प्रशासन पर अपनी पकड़ भी मजबूत कर रहे हैं। वे तमाम तरह के गैरकानूनी कार्य पत्रकारिता की आड़ में संचालित करने में लगे हैं। समाज में सभी सभ्य और संस्कारवान हो, ये सम्भव नहीं है। क्योंकि, ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग न हो। "शेर की खाल में भेडिय़े" कहें या "शराफ़त का मुखोटा लगाए कुकर्मी" इनको अपने आपराधिक कुकर्म को छुपाने के लिए कुछ आड़ चाहिए होती है। वैसे तो अपराधियों के लिए सबसे सुरक्षित क्षेत्र राजनीति रहा है। यहाँ अपराधी सफ़ेदपोश बनकर अपने कुकर्मों को अंज़ाम देता रहा है।
परन्तु, अपराधियों ने अब पनाहगाह के रूप में पवित्र पत्रकारिता के क्षेत्र को भी नहीं छोड़ा है। लेकिन पवित्र पत्रकारिता के क्षेत्र में किसी अपराधी को एन्ट्री मिल रही है तो, कई जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगता है। जैसे कि प्रशासनिक स्तर पर प्रभारी अधिकारी प्रेस, पुलिस, एल0 आई0 यू0 एवं सूचना विभाग के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर आप और हम।
जब भी किसी व्यक्ति को पत्रकार बनाया जाता है तो निरगित संस्थान से 3 पत्र जारी किए जाते हैं। पहला जिलाधिकारी (प्रभारी अधिकारी प्रेस), दूसरा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, तीसरा सूचना अधिकारी। पर अफ़सोस इस बात का है कि इन तीनों ही जिम्मेदार विभागों में बैठे जिम्मेदार लापरवाही अथवा प्रलोभन में आकर प्राप्त हुई पत्रों को फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए छोड़ दिया जाता है। पत्रकारों को अपने विचारों व अभिव्यक्ति को व्यक्त करने के लिए एक नया क्रान्तिकारी मंच मिला। जिसे आज हम न्यूज पोर्टल के नाम से जानते है। दुनिया भर में न्यूज पोर्टल की शुरुआत बड़ी तेजी से हुई न्यूज पोर्टल्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई पुराने अख़बार व टीवी चैनलों ने भी अपना-अपना वेब पोर्टल चैनल शुरू किया । लेकिन जहाँ एक ओर न्यूज पोर्टल से पत्रकारिता में एक नई क्रांति आ रही है वही दूसरी ओर कई बार ये खबर आए दिन चर्चा में रहती है कि न्यूज पोर्टल फर्जी है और न्यूज पोर्टल पर काम करने वाले संवाददाताओं, रिपोर्टर कैमरामैन तथाकथित फर्जी है और आम जनता भी उनको पत्रकार नहीं मानती।न्यूज़ पोर्टल की आड़ में अपराधी, छुटभैय्ये नेता, असामाजिक गतिविधि वाले लोग अपने काले कारोबार को चला रहे है। सरकार में बैठे लोगों के नज़दीकी और संबंधों का फायदा उठा रहे है। छुटभैय्ये नेता, अवैध कारोबारियों, यहां तक बिल्डर और इंडस्ट्रलिस्ट के लिए भी यह धंधा फायदे का साबित हो रहा है। वेबपोर्टल शुरू कर पत्रकार का टैग लगाकर आसानी से अधिकारियों को धौंस दिखाकर सरकारी विज्ञापन हासिल करना, उगाही करना आसान हो गया है। वही सोशल मीडिया पर मज़ाक बनाकर रख दिया है। जिधर देखो उधर वेब मीडिया की आवश्यकता है। जिले में रिपोर्टर, कैमरामैन तो मोबाइल से ही रिपोर्टिंग करना जानते है। पत्रकारिता को आज के समय में न्यूज़ वेबपोर्टलों द्वारा मज़ाक बनाया जा रहा है। कुछ गुंडे-दादा लोग भी अपने सगे-संबंधों के नाम से फर्जी वेबपोर्टल का डोमिन खरीद कर रजिस्ट्रेशन करवा लेते है। और दो चार रिपोर्टर और कैमरामैन रखकर खुद को पत्रकार घोषित करते है।
वर्तमान समय में फर्जी वेब पोर्टलो की तो बाढ़ से आ गई है ,इस बाढ़ में आम जनता बहते जा रहा है, और ये फर्जी पत्रकार अपनी अवैध वसूली की लहरों में आम जनता को लूटते जा रहे है। राजघानी सहित पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में फर्जी पत्रकारों की फौज सक्रिय हैं, जो पत्रकारिता के नाम पर बट्टा लगा रहा है। पूरे प्रदेश में फर्जी पत्रकारों का गिरोह सक्रिय है, जो सरकारी अधिकारियों और कारोबारियों को धमकी, चमकी देकर अवैध वसूली में संलग्न है।
मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। व्यवस्थागत कमियों को दूर करने की पहल के साथ समाज और लोकहित में शोषितों-वंचितों और पीडि़तों के लिए आवाज उठाना पत्रकारिता का धर्म है, लेकिन आज पत्रकारिता का स्वरूप बदल गया है। मीडिया भी पूरी तरह से व्यवसायिक हो गई है। लोग इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत फायदे के लिए करने लगे हैं। पत्रकार भी अब पत्रकार नहीं रहा। स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाले जहां अखबार, न्यूज पोर्टल की आड़ में आर्थिक लाभ के रास्ते तलाशते रहते हैं वहीं बड़े-बड़े बैनर्स, अखबार और न्यूज चैनल से संबद्ध पत्रकारों को संस्थानों ने पत्रकार की जगह समाचार संकलन और लाइजनर बना दिया है।जिन्हें ये विशेषज्ञता हासिल नहीं है उनकी पत्रकारिता ही संकट में है। अब न्यूज पोर्टलों को माध्यम बनाकर कोई भी आदमी पत्रकारिता के आड़ में व्यवसाय के साथ ब्लेमेलिंग और धौंस दिखाकर वसूली जैसा कृत्य कर रहे हैं।इंटरनेट और डिजिटल के जमाने में न्यूज वेबपोर्टल सोशल मीडिया की ही तरह तेजी से प्रचलन में आ रहा है। लोग टीवी पर न्यूज चैनल देखने और अखबार पढऩे की जगह न्यूज पोर्टल और वेबसाइट के माध्यम से मोबाइल पर खबरों का अपडेट लेना पसंद कर रहे हैं। लेकिन इसका बुरा पहलू भी सामने आ रहा है कि कोई भी 10-12 हजार में वेबसाइट बनवा कर न्यूज पोर्टल संचालित करने लगा है। न्यूज पोर्टल चलाने के लिए कोई मापदंड और पात्रता नहीें होने के कारण न्यूज पोर्टलों की बाढ़ आ गई है। पत्रकार तो पत्रकार, कारोबारी, बिल्डर के साथ अपराधी और छुटभैय्ये नेता भी न्यूज पोर्टल की आड़ में अपना उल्लू सीधा करने लगे हैं।न्यूज पोर्टल ब्लेकमेलिंग, वसूली यहां तक की लोगों की निजता और व्यक्तिगत जिंदगी में दखलदांजी का प्लेटफार्म बनते जा रहा है। सोशल मीडिया पर किसी के खिलाफ अपमान जनक पोस्ट करने पर संबंधित प्लेटफार्म के साथ पुलिस का साइबर सेल भी शिकायत दर्ज कर कार्रवाई करता हैं लेकिन न्यूज वेबपोर्टल पर ऐसे कंटेट और पोस्ट पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होती। शिकायत तक दर्ज नहीं की जाती है, इससे न्यूज पोर्टल संचालित करने वाले बेखौफ होकर किसी को भी अपमानित और बदनाम कर ब्लेकमेल करते हैं।न्यूज पोर्टल्स के आने से वास्तविक पत्रकारों को ज्यादा फायदा नहीं हो पाया है। बल्कि न्यूज़ पोर्टल्स के चाटुकार पत्रकारों व भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों का अवैध व्यापार चलने लगा है। क्योंकि किसी विभाग की कमी, भ्रष्टाचार या किसी अवैध व्यापार की जानकारी किसी न्यूज़ पोर्टल के पत्रकार को हो जाती है तो वो खबर लिखने से पहले उस अधिकारी/व्यापारी से बात करके मोटी रकम वसूल लेते है। और अपने न्यूज़ वेब मीडिया में चलाई गलत खबर को भी गायब कर देते है।
, पत्रकार समाज एवं राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्तित्व होता है। अत: पारदर्शिता जरूरी है समाज एवं राष्ट्र को पता होना चाहिये कि कौन व्यक्ति पवित्र पत्रकारिता से जुड़ा हुआ है।
एक व्यावहारिक गणना और साक्ष्यों के मुताबिक़ कक्षा 5वीं या 8वीं और कई मामलों में तो अशिक्षित भी, खुद को मीडियाकर्मी बताते घूम रहे हैं। इनकी संख्या भी सैकड़ों में मिल जायेगी। अब बड़ा सवाल ये है कि वास्तविक पत्रकारों की मर्यादा और पत्रकारिता जैसी महत्वपूर्ण विधा को अपराध और अपराधियों के चंगुल से कैसे बचाया जाए? और आखिर बचायेगा तो कौन ??


1 मंडप, 2 दूल्हन, 2 बच्चे और 7 फेरे: छत्तीसगढ़ के इस जिले में हुई अनोखी शादी, जानिए किस शख्स पर आया 2 युवतियों का दिल ?




राष्ट्र  चंडिका,कोंडागांव. एक अनूठी शादी में एक शख्स ने एक साथ एक मंडप पर दो युवतियों से फेरे लिया. इस शादी की खास बात यह है कि दोनों युवतियों की रजामंदी थी. पूरा मामला छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के केशकाल का है.
दरअसल, ईरागांव क्षेत्र के ग्राम उमला में शादी हुई है. जहां दूल्हा शादी से पहले ही दो बच्चों का बाप बन गया है. गोद में दो बेटियों को लेकर एक ही मंडप पर शख्स ने अपनी पत्नियों से शादी की. दूल्हे ने कहा दोनों से प्यार हुआ, तो शादी कर लिया. अब जीवन भर दोनों को साथ दूंगा.

बता दें कि ईरागांव थाना अंतर्गत ग्राम उमला निवासी रजनसिंह पिता सुखराम सलाम जो पहले ग्राम आडेंगा निवासी दुर्गेश्वरी मरकाम से विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद समाज के बीच सगाई हुई. तब से लड़की लड़का के घर रहने लगी. कुछ माह बाद एक बच्ची पैदा हुई.इसी बीच रजनसिंह को आंवरी निवासी सन्नो बाई गोटा के साथ भी प्रेम हो गया. सन्नो और रजनसिंह का प्रेम इतना आगे बढ़ गया कि एक बच्चे का भी जन्म हो गया. युवतियों से प्रेम संबंध के चलते बिना शादी किए दोनों युवतियों को बेटियां हो गई.मामला की जानकारी लगते ही लोगों के बीच तरह तरह की बातें होनी लगी, तो रजनसिंह ने परिवारों और समाज के रजामंदी के बीच दोनों से शादी करने का फैसला ले लिया. शादी कार्ड में दोनों युवतियों का नाम लिख शादी के बंधन में बंधे.आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष सोनूराम मंडावी ने बताया कि समाज और परिवार कि रजामंदी के बाद शादी कार्ड छपवा कर दोनों ही युवतियों का नाम लिखवाया गया. 8 मई को लगन और टिकावान रखा गया. इस शादी में ग्राम उमला समेत आसपास के 500 से 600 लोग शादी में आशीर्वाद देने पहुंचे. बड़े धूमधाम से शादी हुई.

गरीब महिला से मटका छीनकर भागे बाइक सवार बदमाश

राष्ट्र  चंडिका,पन्ना। चोरी, लूट, छीना झपटी जैसी वारदातें आए दिन सुनने और देखने को मिलती रहती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के पन्ना में आज एक अजीबोगरीब और शर्मनाक वारदात सामने आई है। यहां कोतवाली चौराहे के पास भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में खुले आसमान के नीचे मिट्टी के बर्तन बेच रही महिला से दो बाइक सवार बदमाश मटका छीनकर ले गए।
दरअसल, पन्ना शहर के कोतवाली चौराहे के पास भीषण गर्मी में एक महिला दो वक्त की रोटी के लिए मिट्टी के बर्तन बेच रही थी। इस बीच महिला के पास दो बाइक सवार पहुंचे और मटका दिखाने की बात कही। महिला ने जैसे ही उनको मटका उठाकर दिया, तो उन्होंने मटके को ठोक बजा कर परखा और बाइक स्टार्ट कर मटका लेकर भग गए। महिला चिल्लाते हुए पैसे मांगते रह गई। लेकिन बाइक सवारों ने मुड़कर भी नहीं देखा। यह वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।
वहीं घटना को जिसने भी देखा और सुना सभी ने इस वारदात को बेहद शर्मनाक बताते हुए निंदा की। यह वारदात आज नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है कि कोई इस प्रकार की शर्मनाक हरकत कैसे कर सकता है।


 

Monday, 6 June 2022

इंदौर-भोपाल फिर कोरोना हॉट स्पॉट:MP में 15 दिन में 567 संक्रमित; संभले नहीं तो हो सकता है बेकाबू

 

राष्ट्र चंडिका,भोपाल । जनवरी में आई कोरोना की तीसरी लहर के बाद मरीज भले ही कम हो गए हों, लेकिन संक्रमण अभी भी अपना असर दिखा रहा है। प्रदेश में पिछले तीन दिन से लगातार 40 से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं। दो हफ्तों के आंकड़ों को देखें तो 567 नए संक्रमित मरीज बढ़े हैं। प्रदेश में 248 एक्टिव केस हैं। इनमें सबसे ज्यादा 58 एक्टिव केस इंदौर में हैं। भोपाल में 51, रायसेन में 28, होशंगाबाद में 13, गुना में 11, उज्जैन में 9, ग्वालियर-जबलपुर में 8, मुरैना में 7, बैतूल में 6, मंडला-सीहोर में 5-5, डिंडौरी-कटनी में 4-4, दतिया, बालाघाट, हरदा, निवाड़ी, राजगढ़, शिवपुरी में तीन-तीन, आगर, धार, खरगोन, नरसिंहपुर, नीमच में दो-दो और बुरहानपुर, छतरपुर और सागर में एक-एक एक्टिव केस हैं।

मौतों को लेकर राहत
टीकाकरण के बाद से कोरोना के गंभीर संक्रमण का असर कम हो रहा है। यही वजह है कि तीसरी लहर के दौरान कम मौतें हुईं। पिछले तीन महीनों में सिर्फ 3 मौतें हुई हैं। 19 मार्च को 57 वर्षीय अंसार की मंदसौर जिला अस्पताल में मौत हुई थी। 23 अप्रैल को जबलपुर की 77 वर्षीय गुलाब बाई की जबलपुर मेडिकल कॉलेज में मौत हुई। ठीक एक महीने बाद 23 मई को इंदौर के 80 साल के सौभाग्य सीपी की मौत दर्ज की गई हालांकि वे दूसरे राज्य के अस्पताल में भर्ती थे। दो दिन पहले जबलपुर के दौलत रामचंदानी की जबलपुर जिला अस्पताल में कोरोना से मौत हुई है। हालांकि सवा तीन महीने से भोपाल में कोरोना से कोई मौत नहीं हुई है। 22 फरवरी को एम्स भोपाल में 77 वर्षीय रामेश्वर प्रसाद की 17 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद मौत हो गई थी।