Friday, 26 April 2019



मध्यप्रदेश मेंपहले चरण की इन 6 सीटों पर 29 अप्रैल को होना है मतदान

भोपाल. मध्यप्रदेश में पंद्रह साल बाद कांग्रेस का राज आया है। सरकार आते ही केंद्र से उसकी टकराहट भी शुरू हो गई। चुनावी मौसम में मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के यहां इनकम टैक्स की छापेमारी हुई तो राज्य सरकार ने पिछली सरकार के खिलाफ ई-टेंडरिंग से जुड़ा केस दर्ज करवा दिया। दोनों सरकारों की छटपटाहट लोकसभा चुनाव के लिए है।
पहले चरण में एक सीट कमलनाथ का घर छिंदवाड़ा की है जहां से उनके बेटे नकुल उत्तराधिकारी बन रहे हैं। कमलनाथ भी यहीं से विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे हैं। यानी पिता-पुत्र दोनों के लिए एकसाथ वोट पड़ेंगे जिसमें, दोनों को फिलहाल सबसे आगे माना जा रहा है। जिन सीटों पर चुनाव है, उनमें कोयलांचल की सीटें सीधी, शहडोल, मंडला,बालाघाट व जबलपुर की है जहां कोयला खदानें ही आजीविका का बड़ा साधन है। छिंदवाड़ा की तो पूरी रौनक ही कोयला खनन से है।
परासिया की महादेवपुरी खदान में 32 साल से काम करने वाले नंदकिशोर ने बताया कि वह तो सरकारी लेबर है इसलिए 35 हजार से ज्यादा मजदूरी मिलती है, लेकिन ठेके पर काम करने वालों को तो रोज के 200-300 मिलते हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल व पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह ने नई खदानें शुरू करने का वादा किया था लेकिन कभी पूरा नहीं किया। यहां कम से कम पंद्रह खदानें बंद हो चुकी हैं। पिछले कुछ सालों पहले तक यहां 30 हजार मजदूर थे, जोअब 6 हजार बचे हैं। यहां रोजगार का भीषण संकट दिखता है।
छिंदवाड़ा में नकुलनाथ के सामने भाजपा ने नत्थन शाह कवरेती को उतारा है। यहां संघ ने पूरी ताकत झोंक रखी है। इन दिनों बिजली कटौती व ट्रिपिंग से माहौल बिगड़ रहा है, जुमला चलने लगा है- लगता है वाकई कांग्रेस सरकार आ गई है। राजनीतिक विश्लेषक आरएस वर्मा कहते हैं कि भाजपा व संघ यह माहौल भले ही बनाए, नत्थन शाह की चुनौतियां कम नहीं होंगी
जबलपुर का ग्वारीघाट,जहां मोदी-शाह और राहुल ने नर्मदा मंदिर में आरती की थी। पुजारी संतोष महाराज कहते हैं- नेता लोग नर्मदाजी के नाम से वोट ले लेते हैं परंतु बाद में भूल जाते हैं। सांसद राकेश सिंह से लोगों में नाराजगी है। इसलिए कांग्रेस के विवेक तन्खा का माहौल दिखता है। हालांकि, चुनाव प्रधानमंत्री के लिए है, इसलिए मोदी ही चेहरा हैं। नाव से नदी पार कराने वाले मल्लाह माधव कांग्रेस की न्याय योजना से प्रभावित है।
कहते हैं- 72 हजार रुपए देगी कांग्रेस। मेरा वोट तो राहुल को ही जाएगा। बीसीए ग्रेजुएट पवन सौंधिया और शुभांकर गुप्ता ने कहा- यहां बालाकोट का असर है। लेकिन देखिए, देश की सबसे बड़ी आयुध फैक्ट्रियों के क्वार्टर खंडहर हो रहे हैं, कर्मचारी कम हो गए हैं। कमलनाथ छिंदवाड़ा की तरह यहां कंपनियां बुला लें, तो काम मिले। जबलपुर कहने को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में है। लेकिन यहां स्मार्टनेस तो दूर...सफाई और ट्रैफिक तक सही नहीं है।
सीधी में भाजपा ने मौजूदा सांसद रीति पाठक को ही दोबारा टिकट दिया है। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह के बेटे अजयसिंह को उतारा है। लेकिन यहां आठ में से सात विधानसभाओं पर भाजपा का कब्जा होने से पाठक मजबूत स्थिति में हैं। पूर्व सांसद गोविंद मिश्रा की नाराजगी भाजपा को परेशान करेगी।
शहडोल में भाजपा के मौजूदा सांसद ज्ञानसिंह भी टिकट कटने से खफा है, उन्होंने निर्दलीय उतरकर भाजपा को चुनौती दे दी है। यहां से भाजपा ने हिमाद्रीसिंह को टिकट दिया जो पहले कांग्रेस से हार कर भाजपा में शामिल हुई थी। हिमाद्रीसिंह का विरोध हुआ तो ज्ञानसिंह बगावत पर उतर गए। कांग्रेस की प्रमिलासिंह को इससे जीतने की उम्मीद लग रही है। ऐसे ही हालात बालाघाट सीट पर हैं। यहां भाजपा ने सांसद बोधसिंह भगत का टिकट काट ढालसिंह बिसेन को प्रत्याशी बनाया तो भगत बागी हो गए। हालांकि भाजपा की स्थिति अब तक ठीक है। लेकिन भगत की बगावत भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है।

मंडला की रिजर्व सीट पर भाजपा ने मौजूदा सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते पर फिर से भरोसा जताया है। कांग्रेस ने उनके सामने कमल मरावी को उतारा है। कुलस्ते क्षेत्र के बड़े नेता है, परंतु आदिवासी गोंगपा (गोंडवाना गणतंत्र पार्टी) का यहां दबदबा रहता है और कांग्रेस ने उसी पार्टी के मरावी को कांग्रेस में शामिल कर भाजपा को चुनौती दी है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां की 6 सीटों पर कब्जा जमा कर जड़ें मजबूत कर ली है और गोंगपा के बड़े धड़े ने भी मरावी का समर्थन कर भाजपा के लिए मुश्किल पैदा कर दी है इसलिए मुकाबला कड़ा हो रहा है।
मुद्दे: पानी, न्याय
छिंदवाड़ा के गांवों में पानी हजार फीट तक नीचे जा चुका है। परासिया में पीने का पानी नहीं है, पंद्रह दिन में एक बार आता है। वहीं कोयला खदानें खत्म हो रही हैं। पिछड़े तबकों में कांग्रेस की न्याय योजना की चर्चा दिखती है।
जातीयसमीकरण: हिंदू कार्ड
छिंदवाड़ा में कमलनाथ के नाम पर वोट पड़ते हैं, यहां जाति का गणित नहीं चलता। आदिवासी बहुल सीटों पर पिछड़े व किसान ही निर्णायक हैं और उनका झुकाव कांग्रेस की ओर है। जबलपुर में 2.50 लाख लोधी व कुर्मी पटेल वोट असरदार हैं, लेकिन 3 लाख ब्राह्मण वोट भी निर्णायक हैं। पटेल भाजपा के साथ हैं। हिंदू कार्ड भारी पड़ेगा।

आमिर खान की 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' ने पहले दिन सबसे बड़ी ओपनिंग का रिकॉर्ड अपने नाम किया था;  क्या एवेंजर्स एंडगेम इसे तोड़ पाएगी? 

दर्शकों को भारत में एवेंजर्स एंडगेम का बेसब्री से इंतजार है, जब से भारत में इसकी रिलीज की घोषणा हुई, तब से सभी दर्शकों और व्यापार विश्लेषकों के मन मे एक ही सवाल उमड़ रहा है: क्या एवेंजर्स भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' द्वारा पहले दिन की गयी कमाई का रिकॉर्ड तोड़ने में सक्षम होगी, जिसने बदले में बाहुबली के रिकॉर्ड तोड़ दिए थे?
संख्या के संदर्भ में, आमिर खान की ठग्स ऑफ हिंदुस्तान भारत में अपनी रिलीज के पहले दिन 52.25 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा कलेक्शन करने में सफ़ल रही थी। फिल्म ने दिवाली की छुट्टी का भरपूर फायदा उठाया, जो कि कलेक्शन के लिए साल का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। इसने 'बाहुबली 2: द कन्क्लूजन' को भी लगभग 9 करोड़ रुपये के कलेक्शन के साथ पछाड़ दिया था।
हिंदी स्क्रीन पर 50.75 करोड़ के संग्रह के साथ, यह फ़िल्म हिंदी व्यवसाय में भी अब तक की सबसे बड़ी फ़िल्म है। सिर्फ इतना ही नहीं, तमिल और तेलुगु भाषा में कुल 1.50 करोड़ के कलेक्शन के साथ, फ़िल्म 1 दिन में पूरे भारत में सबसे ज्यादा 52.25 करोड़ की कमाई करने में सक्ष्म रही थी।
सिनेमाघरों में उमंग की एक नई लहर के साथ, भारत में एवेंजर्स एंडगेम ने मध्यरात्रि स्क्रीनिंग के साथ हलचल पैदा कर दी है जो आमतौर पर एक देश के रूप में मध्यरात्रि स्क्रीनिंग आयोजित नहीं करता है। इसी के साथ, आधी रात के बाद सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली मार्वल यूनिवर्स भारत में पहली फिल्म बन गयी है जिसके रात में भी एक से अधिक शो देखने मिलेंगे।
मार्वल की नवीनतम पेशकश, एवेंजर्स: एंडगेम ने चीन में बड़े पैमाने पर बॉक्स ऑफिस पर अपनी शुरुआत की है, जहां यह फिल्म 24 अप्रैल बुधवार को रिलीज हो चुकी है। ध्यान रखें, एवेंजर्स: एंडगेम को अभी संयुक्त राज्य में रिलीज नहीं किया गया है और इस फ़िल्म को 26 अप्रैल के दिन भारत के साथ अमेरिका में भी रिलीज किया जाएगा।
फिल्म के चारों ओर चर्चा के साथ, भारतीय रिलीज ने अटकलबाजी तेज कर दी है कि क्या एक विस्तृत फ्रेंचाइजी का हिस्सा, फिल्म "एवेंजर्स एंडगेम" बेंचमार्क को तोड़ने में सक्षम होगी, जो आमिर खान की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के साथ स्थापित किया था। 

Thursday, 25 April 2019

 आरएसवीपी वयस्कों के लिए भारत का पहला एनिमेटेड यूनिवर्स पेश करने के लिए तैयार! 

 रॉनी स्क्रूवाला की आरएसवीपी वयस्कों के लिए भारत की पहली एनिमेटेड डिजिटल श्रृंखला लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे वक़्त में जब बाज़ार में इस तरह के कंटेंट से एक हाथ की दूरी रखी जा रही, वही रोनी स्क्रूवाला एक बार फिर से बाधित करने के लिए तैयार है। इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म उरी बनाने के बाद, निर्माता अब भारत को द सिम्पसंस के बराबर एक श्रृंखला देने के लिए तैयार है। हमें जो श्रृंखला बताई गई है, वह विनाश के बाद की दुनिया पर आधारित है जहां मनुष्य अपनी मूर्खता के कारण विलुप्त हो गए हैं और जानवर अब वही गलतियां दोहरा रहे हैं। "मैं हमेशा से राम मोहन और आर के लक्ष्मण से प्रेरित रहा हूँ, क्योंकि उनकी आवाज़ हमारें समाज मे हमेशा बुलंद थी और आज भी हमारे समाज में खड़े हैं। यहां हमारा लक्ष्य डिजिटल परिदृश्य के भीतर एक अभिनव और विघटनकारी आवाज तैयार करना है ”, स्क्रूवाला ने कहा। शुरुआत में, मई के अंतिम सप्ताह में यूट्यूब पर एक लघु श्रृंखला लॉन्च की जाएगी। सुपारी स्टूडियो के साथ आरएसवीपी स्वयं इस कंटेंट को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रहे है। --
कभी हो जाते हैं यातायात सिग्नल्स बंद तो कभी रहते हैं चालू! सिवनी । नगर पालिका परिषद के द्वारा लगभग तीस लाख रूपये की राशि से लगभग साढ़े चार साल पहले संस्थापित यातायात सिग्नल्स मजाक बनकर रह गये हैं। ये सिग्नल जब चाहे तब चालू होते हैं और जब चाहे तब बंद हो जाते हैं, जिससे लोग यातायात नियमों का पालन को चाहकर भी नहीं कर पा रहे हैं। ज्ञातव्य है कि नगर पालिका के सामने वाले सिग्नल सहित जी.एन. रोड एवं बाहुबली चौराहे जैसे स्थानों पर जितने भी यातायात सिग्नल लगाये गये हैं, वे या तो अक्सर बंद रहते हैं और अगर चालू हो भी गये तो उनके द्वारा दिये जाने वाले संकेत लोगों को भ्रमित करने वाले होते हैं। इन सिग्नलों के संकेत का पालन कराने हेतु यातायात पुलिस के कर्मचारी जब तक उपलब्ध रहते हैं तब तक तो सब कुछ ठीक चलता है लेकिन उनके न रहने की स्थिति में सब गड़बड़ा जाता है। सिग्नल अगर चालू भी रहते हैं तो दोपहर के वक्त सिग्नल से यहाँ आने – जाने वाले वाहन चालकों को ज्यादा सरोकार नहीं रहता है। कई दिन तक तो ये सिग्नल्स सिर्फ शोभा की सुपारी बने हुए थे, लेकिन उसके बाद जब इन्हें चालू किया गया है तो वे सही ढंग से काम ही नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता इनके चालू रहने से लोग भ्रमित तो हो ही रहे हैं आने – जाने में गलत संकेतों के कारण दुर्घटना की संभावना भी बनी रहती है। वहीं बारापत्थर में बाहुबली चौराहे पर लगे सिग्नल्स में लाल बत्ती होने पर वाहनों की लाईन लग जाती है। वाहनों से निकलने वाले जहरीले धूंए का दुष्प्रभाव यहाँ के दुकानदारों और ग्राहकों पर अगर पड़ रहा हो तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये। यातायात पुलिस के सूत्रों का कहना है कि ये सिग्नल उनके विभाग द्वारा नहीं, बल्कि नगर पालिका और एनएचएआई के द्वारा स्थापित कराये गये हैं और इन्हें व्यवस्थित रूप से चालू करने की जिम्मेदारी उन्हीं की है। संबंधित विभागों को चाहिये कि वे इन सिग्नलों को व्यवस्थित ढंग से चालू रखने में तत्परता दिखायें ताकि इन सिग्नल्स के कारण होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

Monday, 22 April 2019


अप्रैल में कक्षाओं को लगाने का कोई औचित्य अब तक समझ नहीं आ रहा?

राष्ट्र चंडिका.  गर्मी से तो सभी परेशान हो जाते हैं किन्तु जब बात कोमल नन्हे बच्चों की हो तो यह और कष्टदायी हो जाता है. गर्मी आजकल मार्च अंत से ही पड़ने लगती है। तापमान 42 पर है। फिर अप्रैल 30 तक कक्षा लगाने की कोशिश की जाती है, बच्चे गर्मी से बीमार पड़ने लगते हैं तो कक्षा 20 अप्रैल तक कर दी जाती है फिर अखबारों में छपना चालू होता है, तब कलेक्टर साहब मसीहा बन कर सामने आते हैं और 15 अप्रैल तक कक्षाएं समाप्त हो जाती है.इधर अप्रैल में चार पाँच छुट्टी भी हर साल होती हैं, यानी कुल मिला कर 8 या 10 दिन कक्षा लगा कर नूरा कुश्ती का अंत हो जाता है.इधर मार्च अंत में आयकर कटोती के कारण मार्च की तनख्वाह आधी अधूरी मिलती है और अप्रैल की तनख्वाह नये वित्त वर्ष के प्रारंभ होने से 10 से 15 अप्रैल तक मिलती है l नये सत्र की किताबें, कापियां, बस्ता बॉटल आदि मिलाकर कुछ 5000 से 7000 तक का फटका एक बच्चे के नाम पर पालक को लगता है,
हासिल क्या है इसका? जागरूक पालक स्वयं बच्चो को गर्मी में पढ़ाते भी है और अन्य गतिविधियों में उन्हे सीखने सिखाने के लिए भेजते ही है l
तब फिर ये ड्रामा क्यूँ.
ऐसा ही तमाशा स्कूल खुलने के समय.
10 जून को गर्मी चरम पर होती है तब स्कूल प्रारंभ हो जाते हैं, मालवा में मानसूनी बारिश का औसतन आने का समय 20 जून है और कई वर्षो से ये जुलाई के प्रथम सप्ताह तक ही आती है तो स्कूल जल्दी चालू कर क्या संदेश देना चाहते हैं कि अप्रैल की गर्मी बच्चे नहीं सह सकते इसलिए उन्हे जून में तपाया जाये….
भाई हम लोग मार्च में परीक्षा देते थे, 30 अप्रैल को परिणाम आता था और 1 जुलाई से स्कूल खुलते थे तो क्या हम अशिक्षित रह गये?


ओवरटेक करने के चक्कर में आपस में भिड़ी कारें, 3 की मौत


 राष्ट्र चंडिका सिवनी: जिले के बंडोल थाना क्षेत्र में एनएच-7 पर सोमवार सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में तीन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हो गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब एनएच पर कारें ओवर टेक करने का प्रयास कर रहीं थी। इसके बाद तेज रफ्तार तीन कारें आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार में बैठे दो लोगों की मौके पर मौत हो गई। हादसे में 6 से अधिक लोगों के गम्भीर रूप से घायल होने की सूचना है।

एम्बुलेंस की मदद से घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। जहां पर सभी का इलाज जारी है। बंडोल पुलिस ने दुर्घटना की सूचना हादसे के शिकार हुए लोगों के परिजनों को दी। पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुट गई।है।

Thursday, 4 April 2019

सफलता का जश्न मनाने के बाद, "मेड इन हेवन 2" के लिए काम पर लौटी ज़ोया अख्तर!

 गली बॉय और मेड इन हेवन की सफलता के रथ पर सवार, ज़ोया अख्तर ने बिना समय बर्बाद करते हुए मेड इन हैवेन के दूसरे सीज़न पर काम शुरू कर दिया है। अपनी दो विशाल परियोजनाओं की सफलता का स्वाद चखने के बाद, ज़ोया अख्तर ने सोमवार को अपने दोस्तों और सहयोगियों के लिए एक पार्टी  का आयोजन किया था। जश्न के तुरंत बाद, फिल्म निर्माता ने बुधवार को अपनी बहुप्रशंसित वेब श्रृंखला की दूसरी किस्त पर काम शुरू कर दिया है। फिल्म निर्माता ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर टाइपराइटर की एक तस्वीर साझा करतर हुए लिखा,"Back to work #day 1 #writersroom #madeinheaven #season2 #herewego” @reemakagti अपनी हालिया आउटिंग के कारण फिल्म निर्माता के रूप में गहरी छाप छोड़ने वाली, जोया अख्तर ने अपनी हर नई परियोजना के साथ अपेक्षा का स्तर एक पायदान ऊपर कर दिया है। बस्तियों से एक रैपर के उदय की कहानी को पर्दे पर पेश करते हुए, ब्लॉकबस्टर हिट गली बॉय वास्तविक जीवन के रैपर्स डिवाइन और नेज़ी से प्रेरित थी। मेड इन हेवन भी समकालीन समय में सबसे अधिक पसंद की जाने वाली वेब श्रृंखला बन गई है। दोनों कंटेंट को बड़े पैमाने पर इसकी अनोखी कथानक और प्रभावशाली किरदार के लिए सरहाया जा रहा है और इन दो जानदार कहानियों के पीछे स्पष्ट रूप से ज़ोया का हाथ है। ज़ोया अख्तर जो अपनी पिछली रिलीज लक बाय चांस, ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा और दिल धड़कने दो के साथ अपने समय से एक कदम आगे रही हैं, वह अब "गली बॉय" के साथ बॉक्स ऑफिस धूम मचा रही है। चार फीचर फिल्म, दो शार्ट फ़िल्म और एक वेब श्रृंखला के सफ़र के साथ, जोया अख्तर उन अग्रणी फिल्म निर्माताओं में से एक हैं जिन्होंने मनोरंजन उद्योग में अपनी एक जगह बना ली है।  

Wednesday, 3 April 2019

*पिउडाईपाई ने एक गाने के जरिये भूषण कुमार की टी-सीरीज़ से अपनी हार की स्वीकार!*

टी-सीरीज़ की बढ़त के साथ, पिउडाईपाई ने भूषण कुमार की टी-सीरीज़ से हार स्वीकार करते हुए एक वीडियो जारी किया है। विश्व का सबसे अधिक सब्सक्राइब किए गए यूट्यूब चैनल के शीर्षक को हासिल करने के लिए ऑनलाइन जंग में टी-सीरीज़ ने पिउडाईपाई को मात दे कर सफलता अपने नाम कर ली है। तो वही, पिउडाईपाई ने शुभकामना के संदेश के साथ एक वीडियो पोस्ट करके अपनी हार स्वीकार कर ली है। दोनों चैनल के बीच यह जंग लंबे समय से चल रही थी, लेकिन पिछले महीने टी-सीरीज ने आखिरकार अधिक सब्सक्राइबर के साथ यह रेस जीत ली है। कुछ वक्त पहले, टी-सीरीज़ के मुखिया भूषण कुमार ने सोशल मीडिया पर #BharatWins कैंपेन की शुरुआत की थी, जिसमें लोगों से टी-सीरीज़ को दुनिया का सबसे अधिक सब्सक्राइब किया गया यूट्यूब चैनल बनाने में मदद करने की अपील की गई थी। सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, वरुण धवन, अर्जुन कपूर, जॉन अब्राहम जैसी तमाम बॉलीवुड हस्तियों ने पिउडाईपाई और यूट्यूब के बीच चल रही ऑनलाइन लड़ाई में शामिल हो कर यूट्यूब पर टी-सीरीज़ के चैनल की सदस्यता लेने के लिए जनता से अनुरोध करते हुए नज़र आये थे।