Thursday, 4 May 2017

क्यों मुस्कुराते हैं हेलमेट पहने मीडियाकर्मी को देखकर तथाकथित पत्रकार

क्यों मुस्कुराते हैं हेलमेट पहने मीडियाकर्मी को देखकर तथाकथित पत्रकार

राष्ट्रचंडिका/सिवनी। अगर आप सिर पर हेलमेट लगाते हैं तो उससे ापकी सुरक्षा दोपहिया वाहन में सुनिश्चि
त मानी जाती है क्योंकि शरीर का मुख्य अंश कहा जाने वाला मस्तिष्क की सुरक्षा से आप अपने आपको नया जीवन देते हैं। अक्सर देखा जाता है कि राष्ट्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडियाकर्मी जब अपने अन्य साथियों को हेलमेट पहने देखते हैं तो उन्हें ऐसा प्रतीत होता है जैसे हेलमेट पहनना उनके लिये अपमान है। हमने हमेशा प्रयास किया है कि शासन अगर जनहित के कार्य करता है तो हम भी उसे सहयोग प्रदान करें और स्वयं भी उनके निर्देशो का पालन करें आखिर शासन के लोग हेलमेट अभियान के माध्यम से लोगों को इसलिए प्रेरित करते हैं कि वे हेलमेट के माध्यम से दुर्घटना से स्वयं को बचाये। मीडियाकर्मियों को चाहिए कि वे दूसरो को प्रेरित करने से पहले स्वयं भी हेलमेट पहने और दूसरों को भी प्रेरित करें। अगर अपना साथी हेलमेट पहना है तो हमें चाहिए कि उसकी पीठ नहीं थपथपा सकते तो कम से कम उन्हें हेय और तिरस्कार की दृष्टि से ना देखें। 

अधिमान्य पत्रकार का नहीं कोई मापदण्ड

अधिमान्य पत्रकार का नहीं कोई मापदण्ड
राष्ट्रचंडिका/सिवनी। मीडियाकर्मियों को अधिमान्य पत्रकार का दर्जा दिया जाने को लेकर जो खेल चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। लोग 30 वर्षो से कार्य करने के बाद भी अपने आपको अधिमान्य पत्रकार का दर्जा नहीं दिला पाये और कुछ स्थानों पर स्थिति है एक समाचार पत्र से ही अनेक लोग जो अधिमान्य पत्रकार के मानक मापदंडो के विरूद्ध अधिमान्य होकर शासन की योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।
अधिमान्य पत्रकार के लिए भेजे जाने वाले नामों के चयन के लिए एक समिति गठित की जाती है जो सारे दस्तावेजों का अध्ययन के उपरांत अपनी रिपोर्ट जनसंपर्क संचालनालय भोपाल भेजती है इसके पश्चात वहां से इन नामों का चयन कर अधिमान्य पत्रकार होने की अनुमति प्रदान की जाती है लेकिन इस सारी प्रक्रिया के दौरान भाई भतीजावाद का जो खेल चल रहा है उससे वास्तव में इस योग्य पत्रकारो के साथ छल किया जा रहा है
प्रशासन से अपील
 अत: जिला पुलिस प्रशासन से अनुरोध है कि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान इनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का सूक्ष्मता से जांच के उपरांत ही बिना किसी मीडियाकर्मी के खिलाफ कार्यवाही करें जिससे इस परम्परा पर अंकुश लग सके।

डी ब्लॉक वाले पत्रकारों को विभाग ने क्या नहीं हटाया
राष्ट्रचंडिका/ सिवनी। जिले में अनेक लोग है जो किसी ना किसी व्यवसाय में लगे हुए है लेकिन हाल ही में पत्रकारिता जगत के अनेक संगठन है जो अपने आपको मजबूत करने के लिये इन व्यवसायियों को अपने संगठन का कार्ड देकर अवैध एवं अनैतिक कार्य के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। 
क्या पत्रकार जगत के लिये यह शर्म की बात नहीं है कि जिन हाथों में किताब या कलम है उनकी उपेक्षा कर ऐसे लोगों को हम महत्व दे रहे हैं जो कि अखबार को काला अक्षर भैंस मानते हैं। किसी भी कार्यालय में जाकर अफसरों के सामने अफसरशाही बताना और मैं ये छाप दूंगा वो छाप दूंगा जैसी धमकी देकर उन्हें अपना महत्व बताने का फैशन चल रहा है। सुरसा की तरह ये पत्रकार कहीं भी उग जाते हैं और अपने को सर्वमान्य बताने का प्रयास करते हैं। जिला जनसंपर्क विभाग को भी हम इसके लिए दोषी मानते हैं जहां पर ऐसे ऐसे समाचार पत्रों के नाम अंकित है जो कई वर्षो पहले बंद हो चुके हैं या फिर नियमित प्रकाशित नहीं होते लेकिन विभाग द्वारा आज तक इन समाचार पत्रों को अपडेट नहीं किया गया। आज भी समाचार पत्रों की सूची में डी ब्लॉक में आने वाले समाचार पत्रों के संपादक एवं अन्य लोग अपनी धौंस जमाने में पीछे नहीं रहते लेकिन इन पर समय रहते अगर लगाम नहीं लगायी गयी तो ये पूरे पत्रकारिता जगत को ही गंदा कर देंगे। आज स्थिति यह है कि विभागों में फर्जी कार्डधारी एवं फर्जी पत्रकारों के कारण सम्मानजनक पत्रकारो को ही सही जानकारी नहीं मिलती और राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार विभागों में जाने से भी कतराने लगे हैं। आखिर पत्रकार संगठन इन पर अंकुश लगाने के स्थान पर इन्हें बढ़ावा क्यों दे रहा है। अगर जिला प्रशासन इन पर लगाम नहीं लगायेगा तो यह विकास के मार्ग में अवरोध पैदा करेंगे।